देश

‘तुम जन्मदिन पर आने का करके गए थे वादा, तिरंगे में क्यों आये वक़्त से पहले?’

शहीद जवान अमित चतुर्वेदी

देश का वीर सपूत जवान अमित चतुर्वेदी ने भारतीय सेना ज्वाइन करते वक्त देश की रक्षा के अलावा एक और सपना देखा था. वह चाहते थे कि कुछ ऐसा काम करें जिससे उनके परिवार वालो को उनपर गर्व हो. और आज उनके परिवारवालों को उसी गर्व की अनुभूति तो हो रही है लेकिन उसे देखने के लिए आज अमित अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके है. भारतीय सेना का जवान. 3 जून को जन्मदिन था. 31 मई की शाम घर वालों से बात की. कहा, जन्मदिन मनाने घर आउंगा.  लेकिन जन्मदिन के दिन ही तिरंगे में लिपटा अमित का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो पूरा गांव शहीद के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा. बीती 31 मई को अरुणाचल प्रदेश में उल्फा उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान सिपाही अमित चतुर्वेदी ने सर्वोच्च बलिदान दे दिया.

देश के वीर अमित ने 5 साल पहले अप्रैल 2014 में भारतीय सेना जॉइन की थी और 17वीं पेरा फील्ड रेजीमेंट में उनकी तैनाती की गई थी. अमित इसी अप्रैल को छुट्टी पर घर आए थे और तब दोस्तों से अपने जन्मदिन पर पार्टी देने का वादा किया था. हालांकि जन्मदिन आया और अमित भी आए लेकिन शहीद जवान का दर्जा और तिरंगे लिपटे हुए. तीन जून को 26 साल के अमित का जन्मदिन था और जो दोस्त इस दिन पार्टी का इंतजार कर रहे थे वह आज गमगीन हैं.   जानकारी के लिए बताते चले उनके पिता रामबीर चतुर्वेदी भी खुद आर्मी में थे. और सूबेदार पद से रिटायर हो चुके हैं. अमित के दो भाई सुमित और अरुण भी सेना में ही हैं. अमित के परिवार के लिए 3 जून की तारीख काफी खास थी. क्योंकि अमित और अरुण दोनों जुड़वा भाईयों जन्मदिन 3 जून को होता है. लेकिन इस बार यह काफी मनहूश साबित हुई.

मीडिया से  देश के वीर सपूत अमित के भाई सुमित ने बताया कि 31 मई की शाम ऑपरेशन शुरू होने के कुछ समय पहले ही अमित से परिर्वालो से बात हुई थी. अपने जन्मदिन घर पर मनाने को लेकर वह काफी खुश था. यही अंतिम बार हमने उसकी आवाज को अंतिम बार सुना. जन्मदिन के दिन ही अमित का पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. 1 साल के भतीजे ने अमित की चिता को मुखाग्नि दी. शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए जिले के आला अफसर और स्थानीय सांसद और विधायक भी मौजूद रहे.

Back to top button