उत्तर प्रदेश

क्या कल फिर गर्माएगा अयोध्या में राम मंदिर मामला, संतो ने बनाई खास रणनीति !

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अयोध्या । केंद्र में फिर एक बार भाजपा की सरकार बनने के बाद अयोध्या के संत धर्माचार्याें ने अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को घेरने के लिए 3 जून को संतों की बैठक बुलाने का फैसला लिया। संत धर्माचार्य राम मंदिर पर भव्य मंदिर बनाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं क्योंकि मोदी की दूसरी पारी में संत धर्माचार्य राम मंदिर निर्माण को लेकर किसी भी प्रकार की चूक नहीं चाहते।

अयोध्या में 3 जून को राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में विहिप और राम मंदिर से जुड़े साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। विहिप की 15 जून को हरिद्वार में होने वाली विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक राम मंदिर निर्माण की दृष्टि से अहम मानी जा रही है। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में 3 जून को मणिराम दास जी की छावनी में होने वाली बैठक में संत समिति व न्यास द्वारा प्रस्ताव रखे जाएंगे जिसका निर्णय महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव के आखिरी दिन 15 जून को आयोजित संत सम्मेलन में किया जाएगा। संत सम्मेलन में पूरे देश के संत धर्माचार्याें की बैठक होगी।
 रविवार को राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महन्त कमल नयन दास आयोजक ने बताया कि अयोध्या में होने वाली संतों की बैठक व संत सम्मेलन के बाद संतों के प्रस्ताव से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संतों का एक दल मुलाकात करके  अवगत कराएगा।
संतों की बैठक में अयोध्या के संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास, रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती, रामवल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, दशरथ महल के बिंदुगद्दाचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, रंगमहल के महंत रामशरण दास, लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिली शरण दास, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास, महंत राघवाचार्य, महंत वासुदेवचार्य व विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, पुरुषोत्तम नारायण सिंह, विहिप के शरद शर्मा सहित लगभग 150 संत धर्माचार्याें को आमंत्रित किया गया है।
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