मायानगरी

रजनीकांत को जब एक महिला ने समझा भिखारी, हाथ में पकड़ा दिए 10 रूपये

रजनीकांत वो शख्स है जो आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है, बॉलीवुड हो. टॉलीवुड हो. देश हो विदेश हो, गांव हो, शहर हो, हर बच्चा रजनीकांत के नाम से भलीभांति परिचित है, अपनी अच्छी अदाकारी के दम पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है. दक्षिण भारत के अलावा उत्तर भारत में भी रजनीकांत की अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है. रजनीकांत की फिल्म आने के पहले ही टिकटों की बिक्री शुरू हो जाती है. 100 करोड़ 200 करोड़ रुपए की कमाई उनकी फिल्म में आसानी से कर लेती है. उनकी फिल्मों में दमदार अभिनय के अलावा एक शानदार संदेश भी होता है, जिसकी वजह से वह भारतीय जनता के बीच काफी मात्रा में पॉपुलर है.

आज हम आपको रजनीकांत से ही जुड़ा एक वाक़िया बताने जा रहे हैं. बात उन दिनों की है जब रजनीकांत की बहु प्रचलित फिल्म शिवाजी द बॉस बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही थी, रजनीकांत इस सफलता की खुशी मनाने का सोच रहे थे, हर अभिनेता का खुशी मनाने का तरीका होता है, कुछ अभिनेता अपने घर में ही पार्टी का आयोजन करते हैं, वहीं कुछ अभिनेता मंदिर में जाकर भगवान को शुक्रिया अदा करते हैं.

रजनीकांत जमीनी इंसान है, गांव में पले-बड़े और फिर शहर में आकर कंडक्टर की नौकरी करने के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है, जिस कारण से वह आज भी भारतीय परंपरा और संस्कृति के ऊपर विश्वास करते हैं, उन्होंने अपनी फिल्मों की सफलता के लिए मंदिर जाने का प्लान बनाया परंतु उनकी सुरक्षा के लिहाज से मंदिर के अंदर अकेले जाना संभव नहीं था. अगर भीड़ में उन्हें किसी ने पहचान लिया तो भगदड़ जैसी समस्याएं हो सकती थी, जिसका मंदिर की सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें अपनी असली वेशभूषा में जाने से मना कर दिया।

उन्होंने एक तरीका बताया कि अगर रजनीकांत अपना लिबास और रंग रूप मेकअप की सहायता से बदल ले तो उन्हें कोई नहीं पहचान पाएगा और वह आसानी से भगवान के दर्शन भी कर लेंगे। सुरक्षा अधिकारियों की बात रजनीकांत को अच्छी लगी और उन्होंने एक बूढ़े आदमी का भेष बनाया और मंदिर के अंदर चले गए.

जब वह मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ रहे थे, तब एक महिला को लगा कि यह कोई बूढ़ा भिखारी है और इसने कई दिनों से भोजन नहीं किया है. यह सोच पर उस महिला को रजनीकांत पर दया आ गई और उसने पर्स से 10 का नोट निकाल कर रजनीकांत के हाथों पर रख दिया। रजनीकांत ने बिना कुछ कहे उस देश के नोट को अपने पॉकेट के अंदर रख लिया। मंदिर के अंदर पहुंचकर रजनीकांत ने उस 10 के नोट को छोड़कर उनके पॉकेट में जितने भी पैसे थे, सब उन्होंने भगवान को अर्पण कर दिए, भगवान को ढेर सारे रुपए अर्पण करते देख ₹10 का नोट देने वाली महिला को अचंभा हुआ और उसे एहसास हुआ कि यह शख्स भिकारी नहीं बल्कि कोई और है.

जब उसने गौर से देखा तो वह रजनीकांत को पहचान गई परंतु जब तक वह रजनीकांत को पहचान पाती तब तक रजनीकांत मंदिर से बाहर निकल चुके थे, महिला भागते हुए रजनीकांत के पास पहुंची और उनसे माफी मांगी, उसने कहा कि वह अपनी भूल के लिए क्षमा प्रार्थी हैं. उन्हें उनके ₹10 आप वापस कर दे रजनीकांत ने कहा कि उनके द्वारा दिए गए ₹10 उनके लिए भगवान की किसी प्रसाद से कम नहीं है, और भगवान का प्रसाद कभी वापस नहीं किया जाता। आप अपना स्नेह हमारे ऊपर बनाए रखें, रजनीकांत ने अपने साथ हुई है रोमांचक घटना का जिक्र अपनी बायोग्राफी “द इमेज ऑफ़ रजनीकांत” में किया है.

 

Back to top button