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VIDEO : ब्रिज के उद्घाटन से पहले हंगामा, मनोज तिवारी के पहुंचने पर धक्कामुक्की

नई दिल्ली। दिल्ली के वजीराबाद में यमुना नदी पर बने बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज को लेकर सियासत जारी है। अब से कुछ ही देर में खूबसूरत सिग्नेचर ब्रिज का तोहफा मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस ब्रिज का उद्घाटन करेंगे लेकिन इससे पहले दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने समर्थकों के साथ सिग्नेचर ब्रिज के उदघाटन कार्यक्रम में पहुंच चुके हैं। भाजपा नेता को मंच पर जाने से पहले ही पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर भारी हंगामा शुरू हो गया। तिवारी मंच पर जाने के लिए अड़े हुए हैं। इस दौरान मनोज तिवारी को गुस्सा आ गया और वो पुलिस से भिड़ गए। वहीं एक पुलिसवाले को उन्होंने मुक्का भी मारा है। इस बीच पुलिस ने सीएम केजरीवाल को कार्यक्रम में पहुंचने से रोक दिया है। पुलिस फिलहाल हंगामा शांत होने का इंतजार कर रही है।

बता दें कि जहां पर उद्घाटन होना है वहां से सांसद मनोज तिवारी हैं, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली सरकार से उनको न्योता नहीं दिया है। वहीं तिवारी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वो इलाके के सांसद होने के नाते सिग्नेचर ब्रिज पर पहुंचकर अरविंद केजरीवाल का स्वागत करेंगे। सिग्नेचर ब्रिज आज यानी रविवार को आम जनता के लिए खोला जाएगा। इस ब्रिज को पूरा होने में 14 साल लगे हैं, और इस पर कुल लागत करीब 1500 करोड़ रुपये तक आ चुकी है। इसमें अभी 2 लिफ्ट भी लगनी हैं, जिसकी मदद से लोग 154 मीटर ऊपर जाकर एक गिलास बॉक्स से दिल्ली का दीदार कर सकेंगे।

श्रेय को लेकर जंग
बता दें कि डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि बीजेपी ने सिग्नेचर ब्रिज का काम रुकवाने के लिए हर संभव कोशिश की। सिसोदिया ने ट्वीट में कहा कि नाकारा अफसरों को इंचार्ज बनाकर एक साल फाइलें नहीं हिलने दीं। अफसरों को डराया धमकाया। हमने लड़ लड़कर फाइलें क्लियर करवाईं। हर हफ्ते निरीक्षण किया।…आखिर सपना पूरा हुआ। उन्होंने मनोज तिवारी को जवाब देते हुए कहा कि यह पुल बीजेपी के लिए शर्मनाक हो सकता है, दिल्ली के लिए गर्व का अवसर है।

कई बार डेडलाइन मिस होने के बाद आखिरकार 14 साल में बना ब्रिज
यह ब्रिज नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली और बाहरी दिल्ली को जोड़ रहा है। करीब 13 साल पहले सिग्नेचर ब्रिज का प्लान किया गया था। यह प्रोजेक्ट 2004 में मंजूर हुआ था और इसे 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयार किया जाना था। मार्च 2010 में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू हुआ और बाद में इसकी डेडलाइन दिसंबर 2013 कर दी गई। सोमवार से इस ब्रिज पर वाहनों का आवागमन भी शुरू हो जाएगा। जब यह प्रोजेक्ट बनाया गया था तब इसकी लागत सिर्फ 464 करोड़ रुपये थी। ब्रिज की लागत बढ़ती गई और विभागों के बीच आपसी खींचतान भी बढ़ती गई। रिवाइज एस्टिमेट्स को लेकर फाइलें चलती रहीं।

7 जुलाई 2017 को फाइलों के खेल को देखकर डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने सख्त लिखित टिप्पणी की और कहा कि फाइलों में सिग्नेचर-सिग्नेचर खेलने से ब्रिज पूरा नहीं होगा। डेप्युटी सीएम ने लिखा था कि सिग्नेचर ब्रिज ऐसा लगता है कि फाइलों पर सिग्नेचर का सिंबल बन गया है और सिग्नेचर कलेक्ट करने से सिग्नेचर ब्रिज नहीं बनेगा। पीडब्ल्यूडी और डीटीआईडीसी को मिलकर रिवाइज एस्टिमेट फाइनल करना होगा ताकि ब्रिज को पूरा करने के लिए जरूरी फंड जारी किया जा सके। दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि डेप्युटी सीएम की इस सख्ती के बाद रिवाइज एस्टीमेट तैयार हुआ और फिर काम पूरा हुआ है।

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