उत्तर प्रदेश

अखिलेश से जयंत ने की मुलाकात, कहा-‘सीटें नहीं रिश्ते अहम’

जयंत चौधरी और अखिलेश यादव (फोटो-फाइल)

लखनऊ । राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के महासचिव और पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने बुधवार को राजधानी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की। उन्होंने अखिलेश से गठबंधन में अपने दल की सीटों को बढ़ाने का आग्रह किया है। अखिलेश यादव से करीब एक घंटे तक बातचीत करने के बाद जयंत ने बताया कि गठबंधन में उनके दल को लेकर लचीला रुख अपनाया गया है। बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है। सीटों के बंटवारे को लेकर कोई पेच नहीं है। उन्होंने साफ किया कि भाजपा के तानाशाही रवैया के खिलाफ विपक्ष एकजुट है और भाजपा को हर हाल में हराया जाएगा।

सपा कार्यालय में हुई बातचीत को उन्होंने सकारात्मक बताया और कहा कि अखिलेश का रुख सहयोगात्मक रहा है। गौरतलब है कि बीती 12 जनवरी को अखिलेश यादव और मायावती गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर चुके हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटों में से 38-38 सीटें दोनों दलों ने आपस में बांटी हैं। वहीं अमेठी और रायबरेली संसदीय सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी गई है, जबकि दो सीटें अन्य साथियों को देने का फैसला मायावती और अखिलेश ने किया है। माना जा रहा है कि यह दो सीटें रालोद के खाते में दी गई हैं, लेकिन रालोद चाहता है कि उसके लिए सीटों की संख्या और बढ़ाई जाएं। इसी सिलसिले में जयंत चौधरी ने आज अखिलेश यादव से मुलाकात की।

प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने एक सवाल के जवाब में कहा था 

आरएलडी की सीटों के बारे में अलग से बता दिया जाएगा. हालांकि उसी के कुछ देर बाद सपा महासचिव राम गोपाल यादव ने आरएलडी को दो सीटें देने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि दो सीटें जो छोड़ी गई हैं वो आरएलडी के लिए ही हैं.

वहीं, आरएलडी ने सपा-बसपा के सामने छह सीटों की मांगी रखी है. इनमें बागपत, मथुरा, कैराना, हाथरस, मुजफ्फरनगर और अमरोहा सीट शामिल हैं. सपा-बसपा गठबंधन आरएलडी को बागपत और मुजफ्फरनगर सीटें देना चाहता है. इसमें मुजफ्फरनगर से चौधरी अजित सिंह और बागपत सीट से उनके बेटे जयंत चौधरी चुनाव लड़ सकते हैं.

सपा अपने कोटे से आरएलडी को दो सीटें दे सकती है, लेकिन वो सीधे तौर पर नहीं होंगी. वो सीटें ऐसी होंगी, जहां आरएलडी उम्मीदवार सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा. सूत्रों की मानें तो इसके लिए आरएलडी को पहले ही इस फॉर्मूले को बता दिया गया है. अखिलेश यादव और जयंत की पहले हुए बैठक में ही इस बात की जानकारी दे दी गई थी कि दो सीटें आरएलडी अपने चुनाव चिन्ह पर लड़े और दो सीटें कैराना मॉडल के तहत.

दिलचस्प बात ये है कि आरएलडी अपने सियासी सफर में सबसे संकट के दौर से गुजर रही है. मौजूदा दौर में उसके पार्टी के एक विधायक है जो राज्यसभा चुनाव में बीजेपी से जुड़ गए हैं. इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव में अजित चौधरी और जयंत चौधरी भी जीत नहीं सके थे. बता दें कैराना उपचुनाव में सपा बसपा के समर्थन से आरएलडी उम्मीदवार ने जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोला था. हालांकि, ये सपा के उम्मीदवार थे, जिन्हें आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था.

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