धर्म

ये पत्थर नहीं.. स्वयं विष्णु भगवान है, सच्चाई जानकर उड़ जायेंगे होश 

बताते चले हिंदू धर्म में देवी देवताओं की पूजा का खास महत्व माना गया है वैसे देखा जाए तो आजकल के समय में भी हर घर में पूजा पाठ किया जाता है, भगवान के प्रति लोगों में आस्था दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है, जिसकी वजह से भारी की संख्या में लोग भगवान के मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं और अपने घर में पूजा का स्थान बनाते हैं, जहां पर वह रोजाना सुबह-शाम पूजा-पाठ करते हैं, परंतु पूजा पाठ करते समय जाने अनजाने में हमसे ऐसी बहुत सी गलतियां हो जाती है जिसकी वजह से हमको अपनी पूजा का फल नहीं मिल पाता है, पूजा पाठ करने से भगवान आप से जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं वही आपकी एक छोटी सी गलती की वजह से भगवान आप से नाराज भी हो सकते हैं जिसके कारण आपको इसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

यूं तो आपने न जाने कितनी पौराणिक कहानी सुनी होंगी, जिसमें श्राप का जिक्र किया गया होगा। तो ऐसी एक कहानी हम भी आपके लिए लाएं हैं, जिसमें ये है कि आखिर क्यों सिर्फ एक श्राप की वजह से भगवान विष्णु को पत्थर बनकर रहना पड़ रहा है। पत्थर में विष्णु भगवान, आखिर भगवान ने ऐसा क्या किया तो जिसकी सजा वो आजतक भुगत रहे हैं?

पत्थर में विष्णु भगवान :

दरअसल, कहानी भारत के पड़ोसी देश यानि नेपाल की है। नेपाल में एक ऐसी नदी है, जहां विष्णु भगवान आज भी पत्थर के बने हुए है। इस नदी का नाम गंडकी है। शिवपुराण के अनुसार दैत्यों की पत्नी तुलसी, जोकि बहुत ही ज्यादा पवित्र थी, इसीलिए देवगण उनके पति को हरा नहीं पाते थे, जिसकी वजह से भगवान विष्णु ने धोखे से उनकी पवित्रता को छलनी कर दिया था, जिसकी वजह से तुलसी ने विष्णु को श्राप दे दिया था।

आपको बताते दें कि तुलसी ने भगवान विष्णु को ये श्राप इसीलिए दिया था क्योंकि उनकी वजह से उनके पति की मौत होने के साथ भगवान ने उनकी पवित्रता को भंग किया था, जिसके बाद तुलसी ने उन्हें पत्थर बनने का श्राप दिया था, इस पर भगवान ने कहा था  कि गंडकी नदी में तुलसी का पौधा, जिसके पास पत्थर बने हुए विष्णु होंगे। इसके बाद से ही तुलसी की पूजा होने लगी, इतना ही नहीं घर में भी तुलसी के पौधे के साथ पत्थर जरूर रखा जाता है।

गंडकी नदी में कई काले पत्थर पाएं जाते है, जिसमें गदा, शंख, चक्र आदि के निशान भी पाएं जाते हैं, ऐसे में ग्रंथों की माने तो उन पत्थरों को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। बता दें कि इन पत्थरों को शालिग्राम शिला भी कहते हैं। पुराणों की माने तो इस नदी में खुद आकर वास करने के साथ ही सभी कीड़ो से कहा था कि वो दांतो से काटकर पोषाण में उनके चक्र यानि चिन्ह बनाएंगे, जिसका उनके स्वरूप में पूजा होगी।

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