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जितना विराट, उतना ही दिव्य और भव्य होता है कुंभ मेले का स्वरुप : पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि हमारी संस्कृति में ऐसी चीज़ों की भरमार है, जिनपर हम गर्व कर सकते हैं और पूरी दुनिया को अभिमान के साथ दिखा सकते हैं जिसमें कुंभ मेला भी शामिल है। उन्होंने कुंभ मेला का वर्णन करते हुए कहा कि इसका स्वरुप विराट होता है और यह जितना दिव्य होता है, उतना ही भव्य भी होता है । प्रधानमंत्री ने रविवार को आकाशवाणी पर लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 51वीं कड़ी में देशवासियों से भारतीय संस्कृति के रूपों की चर्चा करते हुए कुंभ मेला के महत्व और उसकी भव्यता की चर्चा की। मोदी ने कहा कि कुंभ के बारे में लोग बहुत कुछ सुनते रहे हैं | उसकी भव्यता और विशालता के बारे में काफी कुछ लोगों ने देखा भी होगा और यह सच भी है कि कुंभ का स्वरूप विराट होता है, जितना दिव्य होता है उतना ही भव्य भी होता है । देश और दुनिया भर के लोग आते हैं और कुंभ से जुड़ जाते हैं। कुंभ मेले में आस्था और श्रद्धा का जन-सागर उमड़ता है। एक साथ एक जगह पर देश-विदेश के लाखों करोड़ों लोग जुड़ते हैं। कुंभ की परम्परा हमारी महान सांस्कृतिक विरासत से पुष्पित और पल्लवित हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा

इस बार विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेला 15 जनवरी से प्रयागराज में आयोजित होने जा रहा है जिसका देशवासी बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुंभ मेले के लिए अभी से संत-महात्माओं के पहुँचने का सिलसिला प्रारंभ भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस मेले के वैश्विक महत्व का अंदाज़ा इसी से लग जाता है कि पिछले वर्ष यूनेस्को ने कुंभ मेले को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सूची में चिन्हित किया है। कुछ दिन पहले कई देशों के राजदूत ने कुंभ की तैयारियों को देखा। वहाँ पर एक साथ कई देशों के राष्ट्रध्वज फहराए गए । प्रयागराज में आयोजित हो रहे इस कुंभ के मेले में 150 से भी अधिक देशों के लोगों के आने की संभावना है। मोदी ने कहा कि कुंभ की दिव्यता से भारत की भव्यता पूरी दुनिया में अपना रंग बिखेरेगी। कुंभ मेला ‘स्वयं की खोज’ का भी एक बड़ा माध्यम है, जहाँ आने वाले हर व्यक्ति को अलग-अलग अनुभूति होती है। सांसारिक चीज़ों को आध्यात्मिक नज़रिए से देखते-समझते हैं। खासकर युवाओं के लिए अनुभव प्राप्त करने का एक बहुत बड़ा अवसर हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह कुछ दिन पहले प्रयागराज गए थे। वहां उन्होंने देखा देखा कि कुंभ की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है।

प्रयागराज के लोग भी कुंभ को लेकर काफी उत्साही हैं। इस बार कुंभ में स्वच्छता पर भी काफी बल दिया जा रहा है। आयोजन में श्रद्धा के साथ-साथ सफाई भी रहेगी तो दूर-दूर तक इसका अच्छा संदेश पहुंचेगा। इस बार हर श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के बाद अक्षयवट के पुण्य दर्शन भी कर सकेगा। लोगों की आस्था का प्रतीक यह अक्षयवट सैंकड़ों वर्षों से किले में बंद था, जिससे श्रद्धालु चाहकर भी इसके दर्शन नहीं कर पाते थे। अब अक्षयवट का द्वार सबके लिए खोल दिया गया है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि जब वह कुंभ मेले में जाएं तो वहां के अलग-अलग पहलू और तस्वीरें सोशल मीडिया पर अवश्य साझा करें ताकि अधिक-से-अधिक लोगों को कुंभ में जाने की प्रेरणा मिले।

आस्था का ये कुंभ राष्ट्रीयता का भी महाकुंभ बने

मोदी ने कहा कि ‘अध्यात्म का ये कुंभ भारतीय दर्शन का महाकुंभ बने। आस्था का ये कुंभ राष्ट्रीयता का भी महाकुंभ बने। राष्ट्रीय एकता का भी महाकुंभ बने। श्रद्धालुओं का ये कुंभ वैश्विक टूरिस्टों का भी महाकुंभ बने। कलात्मकता का ये कुंभ, सृजन शक्तियों का भी महाकुंभ बने।’

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