राजनीति

राहुल गांधी का इस्तीफा होगा या नहीं, देने पर अड़े कांग्रेस अध्यक्ष, लेकिन लेगा कौन?

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस में देशभर में संगठन में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं. सोमवार को मिलने पहुंचे पार्टी नेता अहमद पटेल और महासचिव केसी वेणुगोपाल को राहुल ने नया नेता चुनने की बात भी बोली. लेकिन अबतक उनका इस्तीफा न तो मंजूर किया गया है और न ही उनकी जगह दूसरा नेता चुनने की कोई कवायद होती दिख रही है.

सच बात तो ये है ति 17वीं लोकसभा के चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद ही मात्र दिखावेभर के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश करने का नाटक किया. पर, जैसी कि कांग्रेस में वंशवाद की संस्कृति बनी हुई है, उनके इस्तीफे को अस्वीकार करने का नाटक भी किया जा रहा है. कम से कम ऐसा मीडिया में तो कहा जा रहा है.

हकीकत तो यही है कि कांग्रेस के वयोवृद्ध होते नेताओं जैसे मनमोहन सिंह और ए.के.एंटनी से उन्हें  पद पर बने रहने के लिए आग्रह करवाने का ढोंग कृत्य संपन्न किया जा रहा है. हारे हुए सेनापति राहुल को कांग्रेस के लिए अपरिहार्य बताया जा रहा है. सच में राहुल गांधी पर अपने इस्तीफे को वापस लेने का दबाव डालनेवालों ने या ढोंग करने वालों ने 125 बरस पुरानी कही जाने वाली पार्टी को तबाह करके ही रख दिया है.

इन्हीं लोगों ने कांग्रेस के भीतर चमचागिरी की हद करते हुए जवाबदेही की संस्कृति को कभी पनपने नहीं दिया. दुर्भाग्यवश इन्होंने कांग्रेस को ‘नेहरु-गांधी परिवार’ का पर्याय मान लिया. राहुल गांधी ने 2017 में कांग्रेस की कमान संभाली थी. तब से कांग्रेस को देश लगातार खारिज ही करता जा रहा है, पर मजाल है कि कोई उनके नेतृत्व पर जरा-सा सवाल भी पूछ ले.

इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. कहने को तो राहुल गांधी कुर्सी छोड़ना छा रहे हैं. लेकिन किसी भी कांग्रेस नेता में इतनी हिम्मत नहीं कि राहुल गांधी के इस्तीफे को जायज ठहरा सके.

 

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