धर्म

मौत की दस्तक देते हैं ये लक्षण, दिखे तो समझिए होने वाले हैं यमराज के दर्शन

मृत्यु के लक्षण क्या है?

1- कठोपनिषद में अंगुष्ठ मात्र पुरुष का वर्णन आता है। आशय यह है कि आत्मा का आकार अंगूठे के समान है। यह शुद्ध, स्वत: प्रकाशित, धुम्ररहित, अग्नि के सदृश हृदय प्रदेश में विद्यमान अनाहत चक्र में स्थित है। अनाहत चक्र में स्थित सूक्ष्म आत्मा और मनुष्य के हाथ के अंगूठे में आवश्य ही कुछ घनिष्ठ सम्बन्ध है। क्यों कि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कुछ घंटों पूर्व मरणासन्न व्यक्ति अपने अंगूठे को नहीं हिला पाता है। अपने अंगूठे को स्वभाविक रूप से न हिला सकने वाला व्यक्ति तीन दिन के भीतर मर जाता है।

2- दर्पण में अपना सिर न देख सकने वाला और बाह्य वस्तुओं को धूमिल देखने वाला, नेत्र शक्ति से क्षीण व्यक्ति दस दिन के भीतर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

3- आकाश में दो चंद्रमा देखने वाले व्यक्ति की मृत्यु तीन महीने के भीतर हो जाती है।

4- अपनी ही छाया में छिद्र देखने वाला व्यक्ति प्राय: एक महीने के भीतर अपना शरीर छोड़ देता है।

5- कान को बंद करने के बाद यदि कोई किसी को अपने प्राणों की ध्वनि न सुनाई पड़े और उसका हृदय अक्रमिक रूप से धड़कने लगे तो ऐसे व्यक्ति की दस दिन के भीतर मरने की आशंका होती है।

6- वृक्षों को सुनहरे रंग से देखने वाला व्यक्ति लगभग पंद्रह दिनों के भीतर चल बसता है।

7- यदि कोई शरीर के निचले भाग का अनुभव न करे तो ऐसा माना जाता है कि वह व्यक्ति पांच दिन तक ही जीवित रहेगा।

8- स्वप्न में शव का आलिंगन करते वाल व्यक्ति केवल छह महीने तक जीवित रहता है।

9- स्वयं को स्वप्न में नग्न अवस्था में चिंता करते हुए और मृत प्राणियों के लिए आंसू बहाते देख्ों तो ऐसा व्यक्ति केवल इक्कीस दिन जीवित रहता है।

1०- यदि किसी का शरीर सहसा अत्यधिक मोटा हो जाए तो वह व्यक्ति छह महीने के भीतर मर सकता है।

11- सूर्य व चंद्रमा में छिद्र देखले वाले व्यक्ैित की मृत्यु बहुत समीप होती है।

12- अपनी ही जिह्वा के अग्र भाग को न देख सकने वाला व्यक्ति केवल तीन दिन तक जीवित रहता है।

13- यदि कोई कृपण व्यक्ति सहसा दानी और दानी कृपण हो जाए तो यह अभूतपूर्व परिवर्तन निकटवर्ती मृत्यु की सूचना देता है। ऐसे व्यक्ति की जीवनलीला प्राय: छह महीने में समाप्त हो जाती है।

इन सब के इतर मृत्यु के अन्य लक्षण भी है। जिसमें से हाथ के अंगूठे का निष्कि्रय हो जाना मृत्यु का एक निश्चित चिह्न् है।

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