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सर्वे: बंगाल में लड़ाई से बाहर कांग्रेस-लेफ्ट, सीधा मुकाबला बीजेपी और दीदी में

ममता और मोदी के लिए इमेज परिणाम

कोलकाता । लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों का ओपिनियन पोल भी आ गया है। इसमें से इंडिया टीवी सी एन एक्स की ओर से किए गए सर्वे में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटों में से इस बार भाजपा को कम से कम 12 सीटों पर जीत मिलेगी जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल के राज्य की 30 सीटों पर जीत का दावा किया गया है।

इन दोनों पार्टियों के अलावा राज्य में माकपा और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलने का आसार है। यानी 42 सीटों में से सारी सीटे भाजपा और तृणमूल की झोली में जाएंगी। हालांकि अभी चुनाव होने में एक महीने से अधिक का समय बाकी है, इसलिए ये आंकड़े बदल भी सकते हैं। सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बार भाजपा को 31 फ़ीसदी वोट मिलेंगे जबकि तृणमूल कांग्रेस को 40 फीसद वोट मिलने की उम्मीद है। पिछली बार 2014 के चुनाव में भाजपा को 17% वोट मिले थे जबकि तृणमूल कांग्रेस को पिछली बार भी करीब 40 फीसद वोट मिले थे और इस बार भी 40 फ़ीसदी वोट मिलेंगे। इसके अलावा माकपा को 16 फिसदी, कांग्रेस को 9 फ़ीसदी और अन्य पार्टियों को 4 फीसद वोट मिलने के आसार हैं।सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बार बड़ी संख्या में माकपा और कांग्रेस के वोट परसेंटेज में गिरावट आएगी जो भाजपा के खाते में जाने वाली है। कुल मिलाकर कहा जाए तो 2014 में भले ही भाजपा ने राज्य की केवल दार्जिलिंग और आसनसोल सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार बाजी पलटने वाली है और भाजपा राज्य में आश्चर्यजनक रूप से 6 गुना अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

इसके अलावा सर्वे रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि राज्य में अधिकतर सीटों पर जहां भाजपा की मात होगी वहां तृणमूल को कड़ी टक्कर भी देगी। इसके अलावा राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि ये आंकड़े समय के साथ अगर बदलते भी हैं तब भी भाजपा के पक्ष में ही रहेंगे क्योंकि राज्य में सात चरणों में मतदान होना है और बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की मौजूदगी की वजह से अधिक से अधिक लोगों को वोट करने का मौका मिलेगा। राज्य में सत्ता विरोधी लहर का लाभ भाजपा को मिलेगा और अधिकतर लोग जो ममता बनर्जी को नापसंद करते हैं, वे माकपा और कांग्रेस को वोट करने के बजाय भाजपा के पक्ष में ही मतदान करेंगे। कुल मिलाकर कहा जाए तो राज्य में आम लोगों का वोट तृणमूल और भाजपा में लगभग बराबर बराबर बंटने वाला है जो सत्तारूढ़ तृणमूल के लिए सिरदर्द बन सकता है।

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