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शिवसेना का फार्मूला: जब पीएम बनाएंगे बीजेपी का, तो सीएम बनाएंगे हम अपना

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नई दिल्ली । शिवसेना और भाजपा एक-दूसरे पर हमले कर रही हैं लेकिन चुनाव लड़ेंगी साथ-साथ। इसकी घोषणा में देरी की वजह केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर है। शिवसेना इसके लिए अड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस व राकांपा के कुछ नेताओं को पहले लग रहा था कि शिवसेना ने जो तेवर अपनाया है, जिस तरह से भाजपा के नेताओं के विरूद्ध शिवसेना के नेता बयान दे रहे हैं, उसके मुखपत्र “सामना” में लिखा जा रहा है, उसके चलते आगामी चुनाव में दोनों में मिलकर चुनाव लड़ने की उम्मीद नहीं है।

लेकिन इन नेताओं को अब शिवसेना व भाजपा के अपने घनिष्ठ लोगों से पता चला है कि दोनों दलों में लोकसभा व विधानसभा की सीटों के बंटवारे के लेकर बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि भाजपा थोड़ा ऊपर-नीचे करके वह सब मान लेगी जो शिवसेना चाहती है। इसके तहत लोकसभा की ज्यादा सीटों पर भाजपा तथा विधानसभा की ज्यादा सीटों पर शिवसेना लड़ेगी। लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है।

शिवसेना चाहती है कि समझौता का फार्मूला वही रहे जो वाजपेयी के समय होता रहा और भाजपा घोषणा करे कि विधानसभा में सीटें किसी की भी अधिक हो, मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। इस पर भाजपा ‘हां’ नहीं कर रही है। इसी से शिवसेना को आशंका हो रही है कि लोकसभा के चुनाव के बाद भाजपा यू टर्न कर सकती है।

इस बारे में महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व प्रभारी मोहन प्रकाश का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले तेदेपा नेता चंद्रबाबू नायडू आंध्र भवन में धरने पर बैठे थे, तो उनसे शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत मिलने गये थे। बाद में शिवसेना ने सफाई दी कि संजय राउत केवल शिष्टाचार मुलाकात के लिए गए थे| शिवसेना किसी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं बन रही है। इसके एक दिन बाद 13 फरवरी को संसद सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में अपने समापन भाषण में शिवसेना के नेता आनंद राव अडसुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत प्रशंसा की।

उन्होंने भाजपा के फिर से सत्ता में वापसी की संभावना भी जताई। इससे जाहिर हुआ कि शिवसेना तालमेल करके लड़ने को तैयार है। ये दोनों घटनाएं ये सबूत हैं कि शिवसेना, भाजपा का साथ नहीं छोड़ेगी। इस बारे में शिवसेना के एक सांसद का कहना है कि अच्छे साथी का धर्म है अपने मित्र की खामियों को उजागर करना। शिवसेना यही कर रही है। वह भाजपा की खामियों को उजागर कर रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी उनसे कुट्टी हो गई है।

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