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कर्नाटक के सियासी घमासान में कई ‘ऑपरेशन’ जारी

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बेंगलुरु। दो निर्दलीय विधायकों आर शंकर और एच नागेश के जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा के बाद से कर्नाटक में एक बार फिर ‘ऑपरेशन कमल’ का भय राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गठबंधन सहयोगियों जेडीएस और कांग्रेस पार्टी में ‘ऑपरेशन कमल’ का खौफ दिख रहा है।

हांवेरी जिले में रानीबेन्नूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आर शंकर को हाल ही में वन मंत्री के पद से हटा दिया गया था क्योंकि उन्होंने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में शामिल होने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर, कोलार जिले के मुलबागल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एच नागेश को हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मंत्री पद नहीं मिला था और न ही निगम-बोर्डों अथवा संसदीय सचिव के पद पर पुरस्कृत किया गया था।
इन दो निर्दलीय विधायकों ने मुंबई में एक पांचसितारा होटल में डेरा डालकर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट किया है|लेकिन शायद ही कांग्रेस के नाराज शेष विधायक ऐसा ही करें।

बेलगावी जिले के नेता रमेश जारकीहोली को भी मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान हटा दिया गया था| हालांकि उनके छोटे भाई सतीश जारकीहोली को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है| बावजूद इससे वे नाराज चल रहे हैं। तब से रमेश जारकीहोली अपने आप को कांग्रेस पार्टी के नेताओं से दूर रखे हैं और मुंबई के एक होटल में डेरा डाले हुए हैं।

उन्होंने अब तक आधिकारिक तौर पर अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में जाने के इरादे के बारे में घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया में ऐसी अटकलों का दौर जारी है। वर्तमान में 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के 104 विधायक, कांग्रेस के 80, जेडीएस के 37, बसपा का 01 और निर्दलीय 02 विधायक हैं। दो निर्दलीय विधायकों के भाजपा के साथ आने के बाद से उसका आंकड़ा बढ़कर 106 हो गया है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन का 120 से घटकर 118 रह गया है।

विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेशकुमार भी 118 नंबर का हिस्सा हैं। सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों की समान संख्या होने पर दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एचडी कुमारस्वामी और उनके मंत्री सहयोगियों में से जेडीएस और कांग्रेस के नेताओं ने घोषणा की है कि वे भी भारतीय जनता पार्टी के छह विधायकों के संपर्क में हैं और ‘ऑपरेशन भाजपा’ को गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि राजनीतिक स्थिति अब बहुत नाजुक हो गई है।

ऐसी धमकियों की टोह लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी 104 विधायकों को हरियाणा के गुरुग्राम के पांच सितारा होटल में रखा है।
यह पहली बार नहीं है कि भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी को अभी भी कम से कम सात विधायकों के समर्थन की जरूरत है। देखना है कि क्या पार्टी इस आंकड़े को छू पाती है। 

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