देश

किसी भी विषय को जिस प्रिज्म से रवीश देखते हैं, वो उन्हें औरों से ऊपर खड़ा कर देता है..

हर रोज मिलने वाली गालियों और तालियों के बीच Ravish Kumar अपना काम अनवरत करते रहे .. लिखते रहे. बोलते रहे. बिना डरे. बिना बदले..

रविश को Ramon Magsaysay Award मिलना पत्रकारिता के लिए गौरव की बात है..

मैंने रविश को साल दर साल रिपोर्टिंग करते देखा है.. ऐसे विषय और ऐसे पहलुओं को उठाते देखा है जिसके लिए TV में कोई स्पेस नहीं देता.. रविश ने अपना भी स्पेस बनाया और उन मुद्दों को अपने शो में स्पेस दिया जिनके लिए TRP की धुन पर नाचने वाले TV  मीडिया में जगह नहीं होती ..

रविश ने TV के लिए नई भाषा गढ़ी. नए शब्द खोजे. नई सड़क बनाई ..

किसी भी विषय को जिस प्रिज्म से रविश देखते हैं , वो उन्हें औरों से अलग और ऊपर खड़ा कर देता है..

उनसे सहमतियां और असहमतियां अपनी जगह हैं . हाल के 5/6 सालों में उन्हें लगातार निशाने पर भी रखा गया लेकिन ये निशानची उस रविश की रिपोर्ट को भूल जाते हैं , जो गांव-शहर और मोहल्लों में घुमकर बजबजाते सिस्टम की हकीकत दिखाता था..

तब देश में राष्ट्रवाद का नवजागरण नहीं हुआ था..

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजित अंजुम के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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