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राहुल गांधी का नया चुनावी दांव, अब किया ‘गब्बर सिंह टैक्स’ पर बड़ा ऐलान

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इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि के दस्तावेज 1707 किसानों को सौंपे

जगदलपुर । अपने एक दिवसीय प्रवास पर शनिवार को छत्तीसगढ़ पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर जीएसटी को ”गब्बर सिंह टैक्स” की संज्ञा दी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी केन्द्र की सत्ता में आती है तो जीएसटी को खत्म कर दिया जाएगा। राहुल गांधी ने यह बातें राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर के ग्राम धुरागांव में आयोजित ”विशाल आदिवासी कृषक अधिकार सम्मेलन” में कहीं। राहुल गांधी ने कहा कि 2019 में उनकी सरकार बनी तो वो गब्बर सिंह टैक्स की जगह एक सरल टैक्स तैयार करेंगे। इस दौरान उन्होंने टाटा इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि के प्रभावित 1707 किसानों को अधिग्रहित भूमि के दस्तावेज भी सौंपे। राहुल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार मात्र 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा करती थी लेकिन कांग्रेस की सरकार आई तो यह कीमत किसानों को 2500 रुपये मिलने लगी। राहुल ने पूर्व के रमन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार कहती थी कि किसानों को देने के लिए पैसे नहीं हैं।

उन्होंने सवाल पूछा कि जब उस वक्त पैसे नहीं थे, तो फिर कांग्रेस की सरकार आते ही, पैसे कहां से आ गए। बीजेपी, आरएसएस व रमन सिंह के पास पैसे की कमी नहीं है, लेकिन वो आप लोगों के पैसे लेकर या तो अपना पाॅकेट भरते थे या फिर अपने 15 मित्रों के जेबों में डालते थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि जब भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा, किसानों की सहमति ली जाएगी। राहुल ने इस दौरान पांच अलग-अलग तरह के जीएसटी की जगह एक जीएसटी का वादा भी किया। उन्होंने कहा कि अगर 2019 में उनकी सरकार बनी तो वो गब्बर सिंह टैक्स की जगह एक सरल टैक्स तैयार करेंगे। नोटबंदी और बड़े उद्योगपतियों के फरार होने के मुद्दे पर भी राहुल गांधी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। इस दौरान सभा में ”चौकीदार नहीं चोर है” का नारा भी बार-बार गूंजता रहा। राहुल गांधी ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार पांच वर्षों के लिए है, इस दौरान वो किया हर वादा पूरा करेंगे।

उन्होंने कर्जमाफी को लेकर भी पूर्व की रमन सरकार और मोदी सरकार पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में नरेन्द्र मोदी ने साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये 15 बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए हैं लेकिन किसानों का कर्जा माफ नहीं किया। इसके अलावा, राहुल ने बजट में किसानों के लिए राशि वितरित करने की योजना को लेकर भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों को सिर्फ साढ़े तीन रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पैसे देने की बात कहकर उनका मजाक उड़ाया है। अगर उनकी सरकार बनी तो कांग्रेस किसानों के लिए मिनिमम गारंटी इनकम तय करेगी। गांधी परिवार के दिल में बसता है बस्तर राहुल गांधी ने कहा कि बस्तर में हमारे परिवार का पुराना रिश्ता है। जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी हमेशा से ही आदिवासियों के साथ रहे और उनके दिल में रहे। हम हमेशा से ही आदिवासियों का विकास चाहते हैं।

मेरा दिल्ली का दरवाजा सदैव आदिवासियों के लिए खुला रहेगा, यह राजनीति नहीं बल्कि प्यार का हिस्सा है। बस्तर से दिल्ली आने वालों की हरसंभव मदद की जाएगी। हम हमेशा आपसे प्यार करते हैं, प्यार का रिश्ता रखते हैं और सच कहते हैं। 1707 किसानों को लौटायी गई 4359 एकड़ जमीन गांधी ने विशाल आदिवासी कृषक अधिकार सम्मेलन में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि के प्रभावित 1707 किसानों को अधिग्रहित 4359 एकड़ भूमि के दस्तावेज सौंपे। उन्होंने कहा कि देश का यह पहला प्रदेश है, जिसने किसानों की जमीन वापस दिलवाई। जल-जंगल-जमीन पर आपका हक है और जंगल में जो उपज है उसका फायदा आपको मिलना चाहिए। कार्यक्रम में बस्तर संभाग से 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे गए धान की राशि 1328 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। राहुल गांधी ने कोंडागांव में 105 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित मक्का प्रसंस्करण केन्द्र का भी शिलान्यास किया और बस्तर संभाग के 1834 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र और 261 सामुदायिक वनाधिकार पत्र भी वितरित किए।

जब राहुल स्वयं उठकर संचालक के पास पहुंचे कार्यक्रम के प्रारंभ में सहजता एवं सरलता के लिए प्रख्यात राहुल गांधी स्वयं उठकर मंच संचालक के पास पहुंचे और कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत पुलामा के शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ की जाएगी, जिसके बाद दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित की गई। इंदिरा गांधी के पट्टा दिए जमीन पर उतरा राहुल का हेलीकॉप्टर राहुल गांधी का हेलीकाॅप्टर उसी जमीन में लैंड हुआ, जिसे इंदिरा गांधी ने अपने शासन काल में दो एकड़ जमीन का पट्टा दिया था। जमीन के स्वामी धनसिंह की अनुमति से हेलीकाॅप्टर उसी जमीन में उतारा गया।

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