उत्तर प्रदेश

राहुल गाँधी को अमेठी में स्मृति ईरानी ने नहीं, माया-अखिलेश ने हराया ?

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लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस पार्टी में हाहाकार मचा हुआ है. लोकसभा चुनाव में  यूपी की अमेठी सीट से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार ने कांग्रेस पार्टी को हिलाकर रख दिया था। कांग्रेस पार्टी की परंपरागत सीट मानी जाने वाली अमेठी से बीजेपी की स्मृति इरानी ने तकरीबन 55 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी।   यूपी की अमेठी से राहुल गांधी की करारी हार की वजहों की तलाश कर रही कांग्रेस पार्टी की दो सदस्यीय कमिटी ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (एसपी) के ‘असहयोग’ को इसका जिम्मेदार बताया है। कमिटी ने कहा कि दोनों ही पार्टियों की स्थानीय यूनिट ने कांग्रेस का पर्याप्त साथ नहीं दिया था और उनके वोट भाजपा के खाते में चले गए थे।

भाजपा के खाते में चले गए बुआ-बबुआ  के वोट

मिली जानकारी के मुताबिक बताते चले समिति के सदस्य कांग्रेस सचिव जुबैर खान और केएल शर्मा ने पार्टी मीटिंग में  स्पष्ट तौर पर कहा कि कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी में मायावती और अखिलेश की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस पार्टी  को सहयोग नहीं दिया और इस वजह से इन पार्टियों के अधिकांश वोट भाजपा के खाते में चले गए। इस बात को थोड़ा और ठीक से समझाते हुए अमेठी के एक स्थानीय कांग्रेसी ने कहा, ‘राहुल गांधी को साल 2014 के मुकाबले इस बार ज्यादा वोट मिले थे। पिछले लोकसभा चुनाव में जहां उन्हें 4.08 लाख वोट मिले थे, वहीं इस बार उन्हें 4.13 लाख लोगों ने वोट दिया था।’

खबरों की मने तो कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले चुनाव में यहां से बीएसपी पार्टी के उम्मीदवार को को चुनाव में 57 हजार वोट मिले थे और 2019 के चुनाव में राहुल गांधी की हार 55 हजार वोटों से हुई है। अगर BSP (बीएसपी) का वोट कांग्रेस पार्टी  के खाते में आ जाता तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार नहीं होती। अमेठी के कांग्रेस प्रमुख योगेंद्र मिश्रा भी इस बात का समर्थन करते हैं। उन्होंने भी कहा कि एसपी-बीएसपी का असहयोग ही राहुल की हार का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने अमेठी में कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन फिर भी कांग्रेस को उनका साथ नहीं मिला।

पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के बेटे ने भाजपा उमीदवार स्मृति के लिए किया प्रचारः मिश्रा
कांग्रेस प्रमुख योगेंद्र मिश्रा ने अहम जानकारी देते हुए बताया कि एसपी नेता और पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के बेटे अनिल प्रजापति ने खुलेआम भाजपा उमीदवार  स्मृति इरानी के लिए प्रचार किया था। इसके अलावा गौरीगंज से एसपी विधायक राकेश सिंह ने अपने ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्यों को बचाने के लिए बीजेपी का साथ दिया। हालांकि, राकेश सिंह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। बता दें कि गौरीगंज विधानसभा में राहुल गांधी 18 हजार वोटों से स्मृति इरानी से पीछे रहे थे। वह केवल अमेठी विधानसभा से लीड पोजिशन में थे जबकि जगदीशपुर, तिलोई और सलोन विधानसभा में भी उन्हें बीजेपी से कम वोट मिले।

कमिटी अगले हफ्ते सौंपेगी फाइनल रिपोर्ट
राहुल के हार के कारणों की तलाश कर रही दो सदस्यीय समिति ने गौरीगंज और तिलोई विधानसभा के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया है। इसके अलावा वह अगले दो दिनों में जगदीशपुर, सलोन और अमेठी के कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करेंगे। कमिटी अपनी फाइनल रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को अगले हफ्ते तक भेज सकती है।

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