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राफेल : केंद्र से बोला सुप्रीम कोर्ट- क्यों खेल रहे लुका-छिपी का खेल ?

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केंद्र सरकार ने मामले की मंगलवार को होने वाली सुनवाई को टालने की भी मांग की जिसे सीजेआई ने नकारा 

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त हलफनामा दायर करने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने मामले की मंगलवार को होने वाली सुनवाई को टालने की भी मांग की। लेकिन चीफ जस्टिस ने कल की सुनवाई टालने से इनकार कर दिया।

जब केंद्र सरकार ने इस मामले को मेंशन किया तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये मामला पहले से ही ओपन कोर्ट में है। इसके लिए आप मेंशनिंग क्यों चाहते है? आपको यही कहना काफी था कि आप पुनर्विचार याचिका में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने चाहते हैं। आप ये लुका-छिपी का खेल क्यों खेल रहे हैं। हम आपको इसकी अनुमति देते हैं लेकिन कल सुनवाई होगी ।

पिछले 10 अप्रैल को कोर्ट ने राफेल मामले पर लीक दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश करने के खिलाफ दायर केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

मामले पर सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने जो दस्तावेज लगाए हैं वे प्रिविलेज्ड हैं और उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि सरकार की चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है बल्कि सरकारी अधिकारियों को बचाने की है जिन्होंने राफेल डील में हस्तक्षेप किया।

सुनवाई के दौरान चीफ याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि अटार्नी जनरल की आपत्तियां सुरक्षा हितों के लिए नहीं हैं। इनमें से सभी दस्तावेज पहले से ही पब्लिक डोमेन में हैं। ऐसे में कोर्ट इस पर संज्ञान कैसे नहीं ले सकती है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के मुताबिक प्रिविलेज का दावा उन दस्तावेजों के लिए नहीं किया जा सकता है जो पब्लिक डोमेन में हों। ये सभी दस्तावेज पब्लिश हो चुके हैं इसलिए प्रिविलेज का दावा बेबुनियाद है।  इसी मामले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई भी करेगा।

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