उत्तर प्रदेश

जब छोटे भाई को देख छलका बड़े भाई मुलायम का प्रेम, अखिलेश का हुआ ये हाल….

लखनऊ,   चाचा-भतीजे की तल्खियों को कम करने की चाहत लिये समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव रविवार को शिवपाल की जनाक्रोश महारैली में पहुंचे। मुलायम सिंह यादव हालांकि समाजवादी पार्टी की पहचान लाल टोपी पहनकर महारैली में आये लेकिन मंच पर उन्हें भाई शिवपाल को भरपूर स्नेह देते देखा गया। मुलायम के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर समाजवादी पार्टी खड़ी करने वाले शिवपाल यादव ने बड़े भाई का हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर लाये।

इससे पहले उनके रैली स्थल पर पहुंचने पर शिवपाल ने उनका पैर छूकर आर्शीवाद लिया। करीब अट्ठाइस साल के अपने राजनीतिक जीवन में अकेले अपने दम पर शिवपाल ने पहली रैली आयोजित की है। रविवार को यहां रमाबाई अम्बेडकर मैदान में आयोजित रैली में मुलायम सिंह यादव के साथ उनकी छोटी बहू अपर्णा यादव भी थी। मुलायम के इस रैली में पहुंचने के पीछे कयास लगाये जा रहे हैं कि परिवार के बुजुर्ग के नाते वह बेटे अखिलेश और भाई शिवपाल में अभी भी सुलह चाहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक राजेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि मुलायम सिंह यादव कुशल राजनेता हैं, उन्हे पता है कि बेटे और भाई में सुलह होने पर ही सपा ताकतवर रहेगी अन्यथा पार्टी के साथ ही बेटे का राजनीतिक नुकसान ज्यादा हो जायेगा, वैसे भी परिवार का मुखिया सभी सदस्यों में एका चाहता ही है। समाजवादी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) दोनों ही अपने-अपने झण्डे पर मुलायम सिंह यादव का चित्र छाप रहे हैं। अखिलेश और शिवपाल दोनों ही कहते हैं कि उन्हें नेताजी मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद प्राप्त है। 

 सिंह का कहना है कि अपने बलबूते मुलायम सिंह यादव ने कुनबे को राजनीतिक अर्श पर पहुंचाया। परिवार में करीब 30 लोग सक्रिय राजनीति में हैं। वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार कहते हैं कि मुलायम अपने पुत्र अखिलेश का अहित नहीं चाहेंगे। अभी तक के उनके कदमों से साफ है कि मुलायम पहले की तरह पूरे कुनबे को एक देखना चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं होने पर वह अखिलेश को ही सबसे मजबूत और अपने राजनीतिक वारिस के रूप में देखना चाहेंगे। 

दरअसल पिछले वर्ष अक्टूबर से समाजवादी कुनबे में छिड़ी राजनीतिक जंग अब अपने उरेज पर है। परिवार में दो फाड़ होने के बाद शिवपाल यादव ने जहां अपनी अलग पार्टी बना ली है। वहीं परिवार में सांसद धर्मेन्द्र यादव के पिता भी उनके साथ हैं जबकि प्रो. रामगोपाल भतीजे अखिलेश के साथ हैं। इसी तरह रामगोपाल के सांसद पुत्र अक्षय और मैनपुरी के सांसद तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दामाद तेजप्रताप भी अखिलेश के साथ है। अक्षय फिरोजाबाद से लोकसभा के सदस्य हैं जहां से इस बार शिवपाल चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस तरह देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार बनाने वाले मुलायम सिंह यादव अपने सामने ही कुनबे में बिखराव को देख रहे हैं। वह चाहते हैं कि परिवार एक रहे,हालांकि उनकी यह भी इच्छा है कि अखिलेश सबसे मजबूत बने रहें। मुलायम सिंह यादव को जानने वाले कहते हैं कि वह जल्दी हार मानने वाले नहीं हैं।

बतौर पत्रकार उनके राजनीतिक जीवन को लम्बे समय से कवर करने वाले डॉ. अशोक यादव कहते हैं कि शिवपाल के साथ आज नजर आए नेताजी कोई बड़ा चाल भी चल सकते हैं। डॉ. यादव के मुताबिक मुलायम में परिवार को एक करने की कसक है, लेकिन वह क्या सोच रहे हैं या क्या करना चाहते हैं इसका थाह लगाना मुश्किल है। यह भी सही है कि दोनों में केवल मुलायम सिंह यादव ही सुलह करा सकते हैं। 

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