राजनीति

मोदी ने दोबारा ली है जो शपथ, जान लीजिए उसके एक-एक शब्द का मतलब

फिर एक बार देश में बन गई है नरेंद्र मोदी की सरकार. नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. लोकसभा चुनाव 2019 में जबर्दस्त वापसी के बाद पीएम को दूसरे कार्यकाल के लिए शाम 7 बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. आपके मन में भी सवाल होंगे कि यह किस तरह की गोपनीयता है जिसकी शपथ हर प्रधानमंत्री और मंत्री को दिलाई जाती है. गोपनीयता की शपथ का कैसे पालन करते हैं प्रधानमंत्री. तो पद और गोपनीयता, दोनों शपथों के बारे में हम आपको बता रहे हैं ये रोचक बातें.

ये शपथ लिए मोदी-

मैं नरेन्द्र भाई मोदीभारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा. मैं भारत की संप्रभुता एवं अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा. मैं श्रद्धापूर्वक एवं शुद्ध अंतरण से अपने पद के दायित्वों का निर्वहन करूंगा. मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा.

प्रधानमन्त्री की इस शपथ का मूल सारांश यह होता है कि वह ईश्वर की शपथ खाकर कहता है कि यदि देश हित के विषय से सम्बंधित कोई भी जानकारी उसके समक्ष लायी जाएगी, या उसको ज्ञात होगी तो वह उसे सिर्फ उन्ही लोगों (जैसे मंत्रिपरिषद के सदस्यों या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों इत्यादि) के साथ साझा करेगा जिनके साथ वह जानकारी साझा करने के लिए अधिकृत है.

वैसे आपको बता दें कि संविधान में इस प्रश्न के लिए कोई खास कारण नहीं लिखा है कि भारत के प्रधानमन्त्री को शपथ क्यों दिलाई जाती है? लेकिन शपथ को ध्यान से सुनने पर पता चलता है कि शपथ दिलाने के पीछे आस्तिक कारण है क्योंकि शपथ में प्रधानमन्त्री ईश्वर की शपथ लेता है कि वह संविधान के अनुसार बनाये गए नियमों का पालन करेगा और देश की संप्रभुता और अखंडता को बनाये रखने के लिए किसी भी दुश्मन व्यक्ति और देश के साथ कोई ख़ुफ़िया जानकारी साझा नहीं करेगा.

अगर पूरी प्रक्रिया की बात करें तो नियम के अनुसार पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री संवैधानिक परिपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं. उसके बाद हस्ताक्षर किया हुआ यह दस्तावेज राष्ट्रपति के पास जमा किया जाता है. यह दस्तावेज हमेशा के लिए सुरक्षति रखने के लिए संरक्षित भी किए जाते हैं.

 

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