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भारत की तरह पाकिस्तान के पीएम भी लेते हैं पद की शपथ, लेकिन दोनों में होते हैं बड़े बुनियादी फर्क

14 अगस्त 1947, भारत के टुकड़े करके अंग्रेजों ने पाकिस्तान बना दिया. 15 अगस्त 1947, हमारा देश गुलामी की जंजीरों से आजाद हुआ और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बनके सामने आया. हिंदुस्तान और पाकिस्तान, दोनों ही देशों में लोकतंत्र है, मतलब जनता चुनती है कि कौन उसका नेतृत्व करेगा. दोनों देशों में चुने हुए प्रधानमंत्री होते हैं जो पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं. लेकिन हिंदुस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की शपथ में काफी फर्क होता है, जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण का तरीका भारत से बिल्कुल अलग है. वहां कुछ ऐसी कसमें हैं जिन्हें प्रधानमंत्री के लिए दोहराना बेहद जरूरी है. पाकिस्तान में प्रधानमंत्री धार्मिक विश्वास को साक्षी मानकर पाकिस्तान को एक मुस्ल‍िम राष्ट्र के तौर पर स्थापित करने की शपथ लेते हैं. इसके ठीक उलट भारत में संविधान में स्थापित विविधता की सुरक्षा को खास तरजीह दी जाती है.

भारत में पद की शपथ के साथ इसकी गोपनीयता की शपथ भी लेनी होती है. पद की शपथ का ड्राफ्ट संविधान के कानूनों पर आधारित है. पद की शपथ में प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैं  (अपना नाम) ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा.

इसके आगे की शपथ है कि मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा. मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूंगा. मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना सभी तरह के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा.

भारत में इसके साथ ही लेनी होती है गोपनीयता की शपथ. इसमें प्रधानमंत्री कहते हैं कि पीएम के तौर पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर मेरे अधीन या विचाराधीन मामले या राष्ट्रहित से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी को किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों से तब तक साझा नहीं करेंगे, जब तक कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए ऐसा करना जरूरी न हो.

जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शपथ से पहले इस्लाम के प्रति अपने कमिटमेंट को याद करते हैं. प्रधानमंत्री को कहना होता है कि मैं (पीएम का नाम) पूरी ईमानदारी से यह शपथ लेता हूं कि मैं एक मुसलमान हूं और सर्वशक्तिमान अल्लाह की एकता और एकेश्वर रूप पर विश्वास करता हूं. वहां के प्रधानमंत्री पवित्र कुरान को अंतिम किताब और हजरत मोहम्मद को अंतिम पैगंबर मानते हुए शपथ लेते हैं. वह कहते हैं कि मैं प्रलय का दिन और पवित्र कुरान की शिक्षाओं के साथ सुन्नत की सभी जरूरी बातों का ख्याल रखूंगा.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर देश पर सच्चा विश्वास और निष्ठा रखने की शपथ भी लेनी होती है. प्रधानमंत्री इस्लामी गणतंत्र पाकिस्तान के संविधान और कानून के अनुसार फैसले लेने की शपथ के साथ देश की संप्रभुता, अखंडता, एकजुटता का ध्यान रखने की शपथ लेते हैं. यह हिस्सा भारत में प्रधानमंत्री पद की शपथ से काफी मिलता-जुलता है.

 

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