उत्तर प्रदेश

यूपी में अपने दम पर मैदान में हाथ, नहीं चाहिए किसी का साथ

Congresspresident Rahul Gandhi and Akhilesh Yadav (Deepak Gupta/HT )

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख दल समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबन्धन से दोनों ही दलों का फायदा होगा और भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दोनों के बीच गठबन्धन का औपचारिक ऐलान शनिवार को मायावती व अखिलेश यादव की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में किया जाना है। इस बीच कांग्रेस का एक बड़ा बयान सामने आया है. बताते चले.  उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनावों में सपा बसपा महागठबंधन की तस्वीर लगभग साफ होने के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है। कांग्रेस के मीडिया समन्वयक राजीव बख्शी ने ”भाषा को बताया, ”हम एक राजनीतिक दल हैं और उत्तर प्रदेश में अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है।”

उन्होंने कहा, ”हमारे पास लोकसभा में अकेले 45 सीटें हैं और यह किसी भी क्षेत्रीय पार्टी से ज्यादा है। लोकसभा में महागठबंधन किसी राष्ट्रीय पार्टी के इर्द गिर्द बनना चाहिये।” चुनाव की तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर बख्शी ने कहा कि पार्टी एक राजनीतिक संगठन है और हमेशा चुनाव के लिये तैयार है। उन्होंने कहा कि हम समान विचारधारा दलों के साथ बातचीत को तैयार हैं और वे हमारे साथ आएंगे।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”पार्टी को किस के साथ हाथ मिलाना है इसका फैसला हमेशा पार्टी हाईकमान करता है। पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक चाहते हैं कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव मैदान में उतरे और उसकी इन दलों से एक अलग पहचान बने।” 2009 लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुये उन्होंने कहा कि उस समय भी बहुत सी बातें कांग्रेस के खिलाफ थी इसके बावजूद पार्टी ने 21 सीटे प्रदेश में जीती थी और केंद्र में यूपीए की सरकार बनी थी।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अध्यक्षों ने महागठबंधन में सीटों के बंटवारे के लिए शनिवार को एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया है। इस महागठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं दी जा रही है। केवल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के लिए अमेठी और रायबरेली में महागठबंधन के प्रत्याशी न खड़ा किये जाने की बात सामने आ रही है।

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