उत्तर प्रदेश

साहेब..कबतक रहूं कुंवारा, अब तो छुट्टी दे दीजिए हुजूर

यूपी पुलिस सेवा में पुलिसकर्मियों को हमेशा से छुट्टी न मिलने की समस्या रही है। हारी –बिमारी हो, तीज-त्योहार हो या घर में कोई शादी समारोह पुलिसकर्मियों को एक अदद छुट्टी के लिए भी महीनों पहले से अधिकारियो के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन सोचिए जरा अगर किसी सिपाही द्वारा दो दिन की छुट्टी मांगने पर तीन दिन की छुट्टी मंजूर हो जाए तो यकीनन हैरान होना लाजमी है। लेकिन वाराणसी में तैनात एक सिपाही की छुट्टी की अर्जी पढ़कर थानाध्यक्ष महोदय ने उसकी दो दिन की छुट्टी बढ़ाकर तीन दिन कर दी।

जानकारी के मुताबिक वाराणसी के दशाश्र्व्मेध थाने में तैनात एक सिपाही की छुट्टी की अर्ज़ी पढ़कर थाना प्रभारी ने उसे दो की जगह तीन दिन की छुट्टी मंजूर कर दी। वहीं सिपाही को जब दो छुट्टी मांगने पर तीन दिन की छुट्टी मिली तो विभाग में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिर ऐसा सिपाही ने अपनी छुट्टी की अर्जी में क्या लिख दिया जिससे प्रभावित होकर थाना प्रभारी ने उसे तीन दिन की छुट्टी दे दी।

दरअसल सिपाही धर्मेंद्र कुमार ने 28 मई को एक लेटर थानाध्यक्ष दशाश्र्वमेध सिद्धार्थ मिश्रा को संबोधित करते हुए लिखा था। इस पत्र में सिपाही ने अपनी व्यथा बयां की थी। सिपाही ने लिखा था कि ‘ महोदय नम्र निवेदन है कि प्रार्थी काफी परेशान है, प्रार्थी को लड़की देखने के लिए जाना है। प्रार्थी बिना पत्नी के नहीं रह सकता। उसका सरकारी कार्य में मन नहीं लग रहा है। अत: प्रार्थी की सभी परेशानियों को समझते हुए दो दिन का आकस्मिक अवकाश 31 मई से देने का कष्ट करें। ताकि प्रार्थी एक दिन पहले ही घर पहुंच जाए’।

वहीं सिपाही की छुट्टी मांगने की हास्यास्पद अर्जी पढ़कर थानाध्यक्ष सिद्धार्थ मिश्रा पहले तो थोड़े हैरान हुए लेकिन बाद में थोड़ा हंसते हुए और सिपाही के दिली मामले को समझते हुए उन्होने उसकी दो दिन की छुट्टी बढ़ाकर तीन दिन कर दी। साथ ही लिख भी दिया कि, एक दिन का अतिरिक्त अवकाश लड़की देखने के लिए’।

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