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अब CBI के संग्राम में घुसे “जासूस” कांग्रेस ने साथ मोदी सरकार पर निशाना, देखे ये VIDEO

नई दिल्ली. रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद छुट्टी पर भेजे सीबीआई चीफ आलोक वर्मा के दिल्ली स्थित अावास के बाहर गुरुवार सुबह चार संदिग्ध नजर आए। सुरक्षाकर्मियों ने उनसे पूछताछ कि तो वे इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मी निकले। इसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सीबीआई चीफ की जासूसी करा रही है।

दिल्ली में जनपथ पर आलोक वर्मा का आवास है। उनके आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पाया कि दो अलग-अलग कारों में चार लोग बैठे थे और काफी देर तक सीबीआई चीफ के आवास के बाहर घूम रहे थे। बाद में उन्हें पकड़कर अंदर ले जाया गया और पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि इनके पास से इंटेलिजेंस ब्यूरो के आईडेंटिटी कार्ड मिले। दिल्ली पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से इनकार किया है।

इस घटनाक्रम पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘सीबीआई को सेंट्रल बरियल ऑफ इन्वेस्टिगेशन बना दिया गया है। मोदी सरकार अब और निचले स्तर पर चली गई है और आईबी के जरिए सीबीआई डायरेक्टर की जानबूझकर जासूसी करा रही है।’’

राफेल समेत 7 संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे सीबीआई चीफ
सरकार ने जब मंगलवार देर रात सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को अचानक छुट्टी पर भेज दिया, तब उनकी टेबल पर सात संवेदनशील मामलों की जांच से जुड़ी फाइलें थीं। इनमें से एक राफेल सौदे से जुड़ी फाइल भी थी, जिसका कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और वकील प्रशांत भूषण ने भी दावा किया था। राहुल ने आरोप लगाया कि आलोक वर्मा राफेल घोटाले से जुड़े कागजात इकट्ठा कर रहे थे, इसलिए उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया।

सीबीआई चीफ ने कहा- जांच की दिशा सरकार की इच्छा के उलट भी जा सकती है 

केंद्र सरकार ने मंगलवार रात सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को जबरन छुट्‌टी पर भेज दिया। दोनों ने एक-दूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे। अंतरिम व्यवस्था के लिए ज्वाइंट डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव को डायरेक्टर का जिम्मा सौंपा गया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सीवीसी की सिफारिशों पर मंगलवार देर रात ये फैसले लिए। सरकार के फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। वहां उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि हर जांच सरकार के मुताबिक ही चले। कुछ मौकों पर जांच की दिशा सरकार की इच्छा से उलट भी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में आलोक वर्मा की दलीलें
सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होनी है। याचिका में वर्मा ने दलील दी कि उन्हें हटाना डीपीएसई एक्ट की धारा 4बी का उल्लंघन है। डायरेक्टर का कार्यकाल दो साल तय है। प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सीजेआई की कमेटी ही डायरेक्टर को नियुक्त कर सकती है। वही हटा सकती है। इसलिए सरकार ने कानून से बाहर जाकर निर्णय लिया है। कोर्ट ने बार-बार कहा है कि सीबीआई को सरकार से अलग करना चाहिए। डीओपीटी का कंट्रोल एजेंसी के काम में बाधा है।

20 अफसरों के साथ गुजरात कैडर से दिल्ली आए थे अस्थाना
सीबीआई चीफ वर्मा 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं। वहीं, राकेश अस्थाना 1984 आईपीएस बैच के गुजरात कैडर के अफसर हैं जो सीबीआई में नंबर टू हैं। मोदी सरकार बनने के बाद गुजरात कैडर से जो 20 अफसर दिल्ली आए, उनमें अस्थाना भी एक थे। वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने पर ऐतराज जताया था।

माेइन कुरैशी के मामले की जांच से शुरू हुआ रिश्वतखोरी विवाद
सीबीआई में अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। इस जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी। सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। हालांकि, 24 अगस्त को अस्थाना ने सीवीसी को पत्र लिखकर डायरेक्टर आलोक वर्मा पर सना से दो करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया था।

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