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नीतीश का बदला: इन नेताओं को चुन-चुन कर एक ही झटके में कर दिया साफ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में उनके विरोधी कहते आये हैं कि वो अपने सियासी दुश्मनों को किनारा लगाने में बड़ा माहिर हैं. नीतीश समय देख कर अपने विरोधियो को शांत कर देते हैं. कभी उनके खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले नेताओं ने बीजेपी का दामन तो थाम लिया और बड़े नेता भी बन गए लेकिन जब फिर से नीतीश की एनडीए में इंट्री हुई तो बीजेपी नेतृत्व उनके सामने घुटने टेकती नजर आई. अपने बागियों को टिकट के लिए न सिर्फ तरसा दिया बल्कि बीजेपी से भी बगाबत करने को मजबूर कर दिया है.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और जेडीयू नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल देवी, सम्राट चौधरी, नीतीश मिश्रा और रेणु कुशवाहा कभी जेडीयू में हुआ करते थे. इनमे से अधिकतर आगामी लोकसभा में टिकट के दावेदार थे. पुतुल देवी बांका से तो सम्राट चौधरी खगड़िया से चुनाव लड़ने के लिए एकदम ताल ठोक रहे थे. इन नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के इशारे पर तैयारी भी शुरू कर दी थी और लगातार जनसंपर्क में लगे हुए थे. ऐसे में जब इन नेताओं की दावेदारी के बावजूद भी बीजेपी से इन्हें टिकट नहीं मिला तो चर्चा यह जोर पकड़ने लगी है कि नीतीश कुमार ने उनसे पुराना हिसाब बराबर किया है. टिकट न मिलने पर सम्राट चौधरी और नीतीश मिश्रा तो फिलहाल शांत हैं, लेकिन पुतुल सिंह आक्रमक हैं. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो बांका से निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगी.

इन घटनाओं के बीच सियासी गलियारों में चर्चा चल पड़ी है कि नीतीश इन नेताओं से पुराना बदला ले रहे हैं. दरअसल राजद छोड़ने के बाद पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश का दामन थामा था और नगर आवास मंत्रालय भी संभाली थी लेकिनसम्राट चौधरी ने बाद में उनसे भी बगाबत कर ली. ऐसा ही हाल नीतीश मिश्रा और रेणु कुशवाहा का है. रेणु कुशवाहा ने अपने पति को पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर मंत्री पद छोड़ दिया था और बीजेपी में शामिल हो गई थी.

इन नेताओं की जहां-जहां से दावेदारी थी, वो तमाम सीटें या तो जेडीयू के हिस्से में गयी है या एलजेपी के हिस्से में. नीतीश ने इन सीटों को अपने पास रखने में कामयाबी पायी है साथ ही साथ बीजेपी के जातिगत समीकरण को भी तहस-नहस कर दिया है. ऐसे में बीजेपी के लिए बगाबत कहीं नासूर न बन जाए. भले ही ये नेता कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं लेकिन समर्थक नीतीश और सुशील मोदी के खिलाफ भड़ास उतारने में लगे है. सम्राट चौधरी जिस बिरादरी से आते है उसके कई बड़े दिग्गज नेताओं ने बीजेपी को ओबीसी विरोधी बताते हुए पार्टी छोड़ दी है जिसमें बांका से श्रीधर मंडल और गया के वरिष्ठ नेता अजय कुशवाहा का नाम शामिल है. एक पूर्व मंत्री बसावन भगत ने भी सीएम नीतीश के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है, बसावन भगत ने इसके साथ ही सीएम पर बेहद गंभीर आरोप लगाए है.

टिकट कटने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने भी इसका जिम्मेदार सीधे तौर पर जेडीयू को बना दिया हैं. उन्होंने अपना दर्द सोशल मीडिया के जरिये जाहिर की है. बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नवादा से बेगूसराय भेज दिया गया जिससे वो खासे नाराज हैं और उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि यदि उनको मनचाहा सीट नही मिला तो चुनाव ही नही लड़ेंगे. दरअसल मुंगेर सीट लोजपा से जेडीयू ने ली जिसके बदले में नवादा सीट लोजपा को मिली और गिरिराज को अपनी सिटिंग सीट तीतान्जली देनी पड़ी है. मुंगेर, नवादा और बेगूसराय भूमिहारों का गढ़ माना जाता और बलिया लोकसभा से लोजपा उपाध्यक्ष सूरजभान सिंह सांसद भी रह चुके हैं. ऐसे में उनकी पत्नी को नवादा के बदले बेगूसराय भी भेजा जा सकता था लेकिन गिरिराज के सीटिंग सीट पर भेजवाकर सीएम ने गिरिराज के साथ अपना पुराना हिसाब-किताब पुरा कर लिया है. आपको बता दे कि गिरिराज सिंह नीतीश के सबसे बड़े आलोचकों में से एक माने जाते हैं. गठबंधन टूटने के बाद नीतीश पर सबसे ज्यादा हमलावर केन्द्रीय मंत्री ही रहते थे. ऐसे में बड़ी जोरों से चर्चा है कि क्या वाकई सीएम नीतीश कुमार ने अपने सियासी दुश्मनों से हिसाब-किताब बराबर कर लिया है.

मसलन पुतुल देवी स्वभाविक तौर पर बांका से बीजेपी की दावेदार थीं. पहले भी वो सांसद रह चुकी हैं, मगर इस बार सीट शेयरिंग के तहत ये सीट जेडीयू के खाते में गई है. वहां से गिरीधारी यादव कैंडिडेट बनाए गए हैं. वहीं, नीतीश मिश्रा की तैयारी झंझारपुर में थी, लेकिन ये सीट भी जेडीयू ने झटक ली. जबकि सम्राट चौधरी की नजर खगड़िया पर थी, जो एलजेपी के हिस्से रही.

हालांकि, बीजेपी नेता सम्राट चौधरी कहते हैं कि उन्हें कोई शिकायत नहीं है. बीजेपी में काम करने का मौका मिला, यही बहुत है. जहां तक सवाल नीतीश कुमार का है तो बीजेपी में उनका दखल नहीं हो सकता.इस पर आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता भाई बीरेंद्र ने बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों पर चुटकी ली है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपने दुश्मनों से ऐसे ही बदला लेते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने ही उन्हें मंत्री नहीं बनने दिया. वे जोर देकर कहते हैं कि सीएम ने ही नीतीश मिश्रा, सम्राट चौधरी, हुकुम सिंह और रेणु कुशवाहा के टिकट कटवा दिए, क्योंकि ये लोग जेडीयू छोड़कर बीजेपी में गए थे.

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