इंजीनियर, ओपनर, पेसर.. आखिर में बने स्पिनर, R Ashwin को यूं नहीं कहते ‘प्रोफेसर’

भारत के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ऐसे गेंदबाज हैं जो अकेले ही किसी भी टीम की हवा निकाल सकते हैं। यही कारण है कि इस वेटरन बल्लेबाज को टी20 विश्व कप की टीम में शामिल किया गया है। अश्विन को क्रिकेट की दुनिया प्रोफेसर जैसे उपनामों से भी पुकारा जाता है। रविचंद्रन अश्विन ऐसे गेंदबाज हैं, जिनका सफर भी कम चौंकाने वाला नहीं है।

इंजीनियर से स्पिनर तक
रविंचंद्रन अश्विन बेहद पढ़े-लिखे क्रिकेटर हैं और उन्होंने इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक किया है। वे स्कूल के दिनों से ही क्रिकेट खेलते रहे हैं। रविचंद्रन अश्विन के पिता भी क्लब क्रिकेट खेला करते थे। रविचंद्रन अश्विन सिर्फ इंजीनियर ही नहीं हैं वे जब क्रिकेट की दुनिया में आए तो पहले तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। उन्होंने शुरूआती दिनों में तेज गेंदबाजी की और फिर बतौर ओपनर भी कई मैच खेले लेकिन बाद में वे स्पिनर बन गए। अश्विन बतौर स्पिनर ही टीम इंडिया में शामिल हुए और कई बार उन्होंने लाजवाब गेंदबाजी भी की। अश्विन की काबिलियत यह है कि वे गेंद को कई तरह से फ्लाइट कराते हैं और करियर के पीक वे दुनिया के नंबर वन स्पिनर भी बने थे।

2010 में किया डेब्यू
रविचंद्रन अश्विन साल 2010 में भारतीय टीम में शामिल हुए और उसी साल वनडे और टी20 मुकाबले खेले। हालांकि टेस्ट टीम में शामिल होने के लिए अश्विन को 1 साल तक इंतजार करना पड़ा था। अश्विन ने दिल्ली में अपना टेस्ट डेब्यू किया और पहले ही मैच में कमाल की गेंदबाजी करते हुए कुल 9 विकेट झटके। रविचंद्रन ने उस मैच में 5 विकेट लेने का भी कारनामा कर दिखाया और प्लेयर ऑफ द मैच भी चुने गए। इसके बाद अश्विन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक मुकाम हासिल करते गए।

धोनी की टीम के घातक गेंदबाज
रविचंद्रन अश्विन 2010 में टीम इंडिया में शामिल हुए और वे महेंद्र सिंह धोनी की टीम के सबसे घातक स्पिनर बने रहे। उसी साल उन्हें आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स ने खरीद लिया। चेन्नई को कई बार ट्राफी दिलाने में रविचंद्रन अश्विन का बड़ा योगदान रहा है।