स्वतंत्र देव ने RSS के दबाव में छोड़ी कुर्सी, UP भाजपा अध्यक्ष के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी

यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने इस्तीफा दिया। सवाल उठा कि आखिर स्वतंत्र देव सिंह ने इस्तीफा क्यों दिया? क्योंकि भाजपा में राज्य इकाई के प्रमुख का अपने पद से इस्तीफा देने का रिवाज नहीं है। तो फिर स्वतंत्र देव सिंह को इस्तीफा देने की ज़रुरत क्यों पड़ गई? ये खुद स्वतंत्र देव सिंह की इच्छा थी या फिर कोई बड़ा दबाव?

ये तस्वीर 27 जुलाई की है। जल शक्ति मंत्रालय के तीनों मंत्री विभागीय बैठक में है। स्वतंत्र देव सिंह बीच में है, जबकि दाएं तरफ दिनेश खटीक और बाएं तरफ रामकेश निषाद हैं।
ये तस्वीर 27 जुलाई की है। जल शक्ति मंत्रालय के तीनों मंत्री विभागीय बैठक में है। स्वतंत्र देव सिंह बीच में है, जबकि दाएं तरफ दिनेश खटीक और बाएं तरफ रामकेश निषाद हैं।

RSS के दबाव में स्वतंत्र देव सिंह को देना पड़ा इस्तीफा
भाजपा और संघ से जुड़े सूत्रों का दावा है कि स्वतंत्र देव सिंह ने खुद से नहीं बल्कि RSS के कहने पर इस्तीफा दिया था। स्वतंत्र देव सिंह के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के पीछे की बड़ी वजह दिनेश खटीक भी है। दिनेश खटीक के इस्तीफे ने ही स्वतंत्र देव सिंह के इस्तीफे की कहानी लिख दी थी। खटीक के आरोपों ने ही स्वतंत्र देव की कुर्सी हिला दी। अपने इस्तीफे पर स्वतंत्र अब तक कुछ भी साफ-साफ नही बता रहें हैं। क्योंकि उन्होंने अपना इस्तीफा संघ के दबाव में आकर दिया है।

19 जुलाई को जल शक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
19 जुलाई को दिनेश खटीक ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

दिनेश ने विभाग में भ्रष्टाचार खोला, स्वतंत्र खुद दबाव में आए
जल शक्ति मंत्रालय में स्वतंत्र देव सिंह के जूनियर मंत्री दिनेश खटीक ने 19 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे की वजह विभाग में उनके साथ हो रहे भेदभाव को बताया था। दिनेश ने आरोप लगाया कि वह नाम के तो राज्यमंत्री हैं, लेकिन काम कोई नहीं दिया गया। दिनेश ने विभाग में भ्रष्टाचार की बातें भी लिखी थी। स्वतंत्र देव सिंह इस विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं, लिहाजा आरोपों के घेरे में आ गए। दिनेश खटीक संघ से जुड़े हुए हैं, लिहाजा इस मामले को संघ ने बेहद गंभीरता से लिया और स्वतंत्र देव पर दबाव बन गया।

CM ने बचाई कैबिनेट की कुर्सी!
दिनेश खटीक के आरोपों के बाद ही स्वतंत्र देव सिंह की कुर्सी हिल गई थी। खटीक ने अपने इस्तीफे में लिखा था कि दलित होने की वजह से उनसे भेदभाव किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि संघ ने विभाग में भ्रष्टाचार और दलित के साथ भेदभाव के आरोप को गंभीरता से लिया। खटीक का संघ का बैकग्राउंड होने की वजह स्वतंत्र देव सिंह पर दबाव बढ़ गया। उन्हें सीएम योगी के दरबार में जाकर सफाई देनी पड़ी। तब जाकर कैबिनेट की कुर्सी बच पाई है।

RSS से जुड़े हुए है दिनेश खटीक
दिनेश खटीक दलित समाज से आते है। RSS दलितों में पैठ बनाने की कवायद में जुटा हुआ है। खटीक ने अपने इस्तीफे में दलित के आधार पर भेद-भाव की बात लिखी थी। संघ नहीं चाहता कि बीजेपी की छवि दलित विरोधी बने। वैसे भी खटीक का संघ से पुराना रिश्ता है। खटीक ने भी RSS के साथ अपना करियर शुरू किया और 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में मेरठ की हस्तिनापुर आरक्षित सीट से जीत हासिल की। दिनेश खटीक के दादा बनवारी खटीक और पिता देवेंद्र कुमार भी संघ के पदाधिकारी थे।

ये लेटर जलशक्ति विभाग में कार्य विभाजन का है। दोनों राज्यमंत्रियों दिनेश खटीक और रामकेश निषाद के बीच कामों का बंटवारा हो गया है।
ये लेटर जलशक्ति विभाग में कार्य विभाजन का है।  

दिनेश खटीक को मिला विभाग में काम
दिनेश खटीक को विभाग में काम मिल गया है। जल-शक्ति विभाग के दोनों राज्यमंत्रियों दिनेश खटीक और रामकेश निषाद के बीच कामों का बंटवारा हो गया है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आदेश पर विभाग ने कार्यों का बंटवारा कर दिया है।