श्री प्रकाश शुक्लाः ये फोटो अगर नहीं मिलती तो आज भी ज़िंदा होता यूपी का सबसे बड़ा डॉन!

90 के दशक में श्रीप्रकाश शुक्ला ने अपनी करतूतों से यूपी पुलिस और खासतौर पर लखनऊ पुलिस की नाक में दम कर रखा था। वो वारदात करके निकल जाता और पुलिस लकीर पीटती रह जाती । इसके अलावा पुलिस का एक सिरदर्द और बढ़ गया था वो था मोबाइल फोन का इस्तेमाल । 31 मार्च 1997 को पहली बार लखनऊ में मोबाइल फोन की शुरुआत हुई थी । लखनऊ के कैसरबाग में हुए दिलीप होटल गोलीकांड में रेलवे ठेकेदार भानू मिश्रा के कमरे में ए के 47 का बर्सट फायर मारने के बाद श्रीप्रकाश ने गोरखपुर में उसके घर लैंडलाइन पर फोन कर भानू के बड़े भाई को बताया था कि तुम्हारे छोटे भाई का मर्डर हो गया है, कफन के साथ लखनऊ पहुंचो ।

चूंकि फोन वारदात के महज दो मिनट बाद किया गया था, लिहाजा पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए पांच-सात किलोमीटर के दायरे में जितने भी एसटीडी बूथ थे वहां पर छापेमारी की लेकिन पुलिस को कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। कई दिन बाद लखनऊ पुलिस को पता चला कि फोन मोबाइल फोन से किया गया था । मोबाइल का कनेक्शन गोमतीनगर के एक पते पर लिया गया था।

पुलिस को पता चला कि पिछले तीन दिन से वो मोबाइल फोन गोमतीनगर के उसी टॉवर में चल रहा था जिस पते पर मोबाइल खरीदा गया था। लखनऊ पुलिस को उम्मीद थी कि हो सकता है कि चौथे दिन भी फोन करने वाला वहीं मौजूद हो। तुरंत एक क्रैक टीम तैयार की गई और रात में उस मकान पर दबिश दी गई। जब दबिश दी गई तो वहां पर पुलिस को एक महिला और दो लड़कियां मिली। पुलिस ने पूरे मकान की तलाशी ली लेकिन वहां से पुलिस को कुछ खास नहीं मिला। पहली बार ये जरुर पता चला कि हत्या और वसूली की वारदात को अंजाम देने वाला न तो अशोक सिंह है और न ही सूरजभान बलकि श्रीप्रकाश शुक्ला है। श्री प्रकाश, अशोक सिंह और सूरजभान के नाम से वसूली के लिए फोन किया करता था ताकि पुलिस नामों में ही उलझी रहे।

एक तरफ तो श्री प्रकाश शुक्ला गैंग के मोबाइल फोन का इस्तेमाल पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था । वहीं दूसरी तरफ पुलिस जिस बड़े अपराधी को पकड़ने की तमाम कोशिशें कर रही थी उसकी फोटो तक पुलिस के पास नहीं थी। तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस को श्रीप्रकाश शुक्ला की कोई फोटो नहीं मिल रही थी। गोरखपुर में श्री प्रकाश शुक्ला के ताप का शिकार बने वीरेन्द्र शाही और हरिशंकर तिवारी से भी संपर्क किया गया। दोनों का ही पूर्वांचल में खासा दबदबा था ।

उनसे भी श्री प्रकाश की फोटो उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। दोनों ही परिवारों ने काफी कोशिश की लेकिन श्री प्रकाश शुक्ला की फोटो उन्हें भी नहीं मिली। श्री प्रकाश के दो दोस्त नीलेन्द्र पांडे और किशोरी लाल से भी पुलिस ने संपर्क किया कि कहीं से श्री प्रकाश की फोटो मिल जाए लेकिन उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। पुलिस को पता चला कि गोरखपुर में सैनी नाम का एक फोटोग्राफर था जो शादियों में फोटो खींचा करता था, वीडियो भी बनाया करता था । पुलिस को लगा कि इस फोटोग्राफर से श्री प्रकाश शुक्ला की कोई फोटो मिल जाए।

पुलिस को अंधेरे में उम्मीद की किरण नजर आ रही थी। इस बात की खबर लगाई गई कि श्री प्रकाश गोरखपुर में किस-किस शादी में शरीक हुआ था । पता चला कि दो-तीन शादी में वो गया था । फोटोग्राफरों का भी पता किया गया उन्हें भी उठाया गया लेकिन सबने मना कर दिया। इस बीच इस बात की खबर श्री प्रकाश को भी लगी। एक दिन श्री प्रकाश सैनी फोटोग्राफर के पास गया और उसको बोला कि तुम मेरी फोटो बांट रहे हो, उसने मना किया इस पर श्री प्रकाश ने तीन-चार गोली उसके जिस्म में उतार दीं और वहां से चलता बना। सैनी फोटोग्राफर के कत्ल के बाद तो सारे फोटोग्राफर्स के बीच दहशत फैल गई और अब कोई भी पुलिस की मदद करने के लिए तैयार नहीं था।

पुलिस के सामने सारे रास्ते बंद होते जा रहे थे क्योंकि केवल चेहरे-मोहरे, कद-काठी का अंदाजा लगाकर वो कैसे श्री प्रकाश का कोई स्कैच बनवाते । हालांकि लखनऊ पुलिस ने हिम्मत नहीं हारी और श्री प्रकाश की फोटो ढूंढने के काम में लगी रही। पुलिस को पता लगा कि लखनऊ के हजरतगंज में श्री प्रकाश शुक्ला का एक रिश्तेदार रहता है। श्री प्रकाश का उसके घर पर आना जाना था। पुलिस को लगता था कि वहां पर कोई फोटो मिल जाए।

तय किया गया कि रिश्ते में श्री प्रकाश के बहनोई लगने वाले शख्स के यहां रेड डाली जाए। पुलिस की एक टीम उस मकान पर पहुंची और लॉटरी का व्यवसाय करने वाले उस रिश्तेदार को धर-दबोचा। पहले तो उसने श्री प्रकाश से कोई भी रिश्ता होने से मना कर दिया लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो उसने बताया कि श्री प्रकाश अक्सर उसके यहां आता था लेकिन पिछले कई दिन से वो नहीं आ रहा है।

पुलिस ने उससे श्री प्रकाश की फोटो मांगी और साथ ही उसे धमकी भी दी कि वो कहीं से भी श्री प्रकाश की फोटो पुलिस को उपलब्ध कराएं नहीं तो पुलिस उसके खिलाफ ही अपराधी को शरण देने और बाकी मुकदमों में उसके खिलाफ और घर की महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई कर उनको भी जेल भेजा जाएगा। हालांकि इस धमकी का पति-पत्नी पर कोई असर नहीं पड़ा और वो लगातार इस बात की रट लगा रहे थे कि वो श्री प्रकाश शुक्ला की फोटो उपलब्ध नहीं करा सकते हैं ।

इस बीच घर की बेटी आ गई और पुलिस ने उससे अलग कमरे में ले जाकर पूछताछ करना शुरु किया। उसने बताया कि श्री प्रकाश उसका मामा लगता है। पुलिस ने अब उस लड़की को विश्वास में लेना शुरु किया और उससे पूछा गया कि उसको किस चीज का शौक है तो उसने बताया कि उसे फोटोग्राफी का शौक है। पुलिस ने पूछा फोटोग्राफी किससे करती हो, कैमरा है तुम्हारे पास.. तो वो एक छोटा कैमरा निकाल कर ले आई और पुलिस को अपना कैमरा दिखाया।

पुलिस ने छापेमारी करने से पहले होमवर्क भी किया था। लिहाजा पुलिस को इस बात का पता था कि आखिरी बार श्री प्रकाश अपने बहनोई के यहां अपनी भांजी के जन्मदिन पर आया था। ये भी पता चला कि वो महंगा तोहफा लेकर घर पर पहुंचा था। लड़की ने बताया कि छह महीने पहले उसका जन्मदिन था। पुलिस ने पूछा क्या उस दिन की तस्वीरें है तुम्हारे पास तो लड़की ने बताया कि हां उस वक्त की तस्वीरें उसके पास हैं। वो एक किताब लेकर वापस आई और उसी किताब के पन्नों के बीच से उसने चार-पांच फोटोग्राफ निकालकर पुलिस को थमा दीं।

तस्वीरों में उसके मां-बाप, उसके कुछ दोस्त भी दिख रहे थे। साथ ही फोटो में एक खूबसूरत नौजवान भी पुलिस को नजर आया । पुलिस ने लड़की से पूछा कि ये कौन है तो उसने बताया कि यही श्री प्रकाश मामा हैं। फोटो मिलने की खबर पास के ही कमरे में बैठे लड़की के मां-बाप को भी लग गई। दोनों भाग के अब उस कमरे में आ गए जहां पर पुलिस लड़की से पूछताछ कर रही थी। आते ही दोनों ने पुलिसवालों के पांव पकड़ लिए। उनका कहना था कि ये फोटो अगर बाहर किसी ने देखी या कहीं भी छपी तो श्रीप्रकाश को पता लग जाएगा कि ये फोटो इसी घर में खिंची है और वो किसी भी हालत में पूरे परिवार को छोड़ेगा नहीं। वो सौ फीसदी पूरे परिवार का कत्ल कर देगा भले ही वो उसके रिश्ते में बहन-बहनोई लगते हों।

पुलिस ने परिवार को दिलासा दिलाया कि अगर श्री प्रकाश ने फोटो देख भी ली तब भी उसे पता नहीं चलेगा। इसके बाद पुलिस की टीम वहां से निकल गई। टीम को फोटो के साथ एसएसपी दफ्तर आने को कहा गया क्योंकि तत्कालीन एसएसपी श्री प्रकाश की फोटो को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी करना चाहते थे। हालांकि पति-पत्नी की बात अब भी पुलिस के दिमाग में घूम रही थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि फोटो सार्वजनिक होते ही इस परिवार का बचना मुश्किल है। अगर परिवार को कुछ होता है तो फिर से पुलिस की फजीहत होगी क्योंकि श्री प्रकाश के रिश्ते का बहनोई लॉटरी का एक बड़ा व्यापारी था और उसका समाज में ठीकठाक रसूख था।

पुलिस की टीम बस इस उधेड़बुन में लगी थी कि कैसे कुछ ऐसा किया जाए कि काम भी हो जाए और श्री प्रकाश को पता भी न लगे कि पुलिस को ये फोटो कहां से मिली है। तब पुलिस की टीम के एक सदस्य ने सुझाव दिया कि इस फोटो का नक्शा चेंज कर दिया जाए यानि कुछ ऐसा किया जाए कि मालूम ही न चले कि ये फोटो कब और कहां ली गई थी। पुलिस के एक अधिकारी उस फोटोग्राफ को लेकर हजरतगंज बाजार गए और वहां उन्होंने पटरी पर हीरो की इमेज वाले कई पोस्टकार्ड बिक रहे थे। उनके दिमाग में आइडिया आया ।

उन्होंने एक पोस्टकार्ड लिया जिस पर सुनील शेट्टी की तस्वीर थी जिसमें उसने डेनिम शर्ट पहन रखी थी। इसके बाद वो उस पोस्टकार्ड को लेकर एक रंगीन फोटो स्टेट की दुकान पर पहुंचे। श्री प्रकाश शुक्ला की फोटोग्राफ देखकर दुकानदार भी घबरा गया लेकिन जब पुलिस ने उसे विश्वास में लिया तो वो तैयार हो गया। बड़ी बारीकी से फोटोग्राफ में से श्रीप्रकाश शुक्ला के चेहरे और गर्दन का हिस्सा काटा गया उसके बाद पोस्टकार्ड में से सुनील शेट्टी की गर्दन और चेहरे का हिस्सा काटा गया और फिर पोस्टकार्ड में सुनील शेट्टी की फोटो में श्री प्रकाश शुक्ला का सिर फिट कर दिया गया।

खुशकिस्मती से श्री प्रकाश के चेहरे वाला फोटो पोस्टकार्ड वाले सुनील शेट्टी के चेहरे पर पूरी तरह से फिट आ गया और देखकर अंतर बताना मुश्किल था कि इस फोटो में चेहरा और धड़ अलग हैं। इसके बाद ग्लॉसी शीट पर उस फोटोग्राफ की करीब दो सौ कॉपियां निकाली गईं और इन सभी फोटो कॉपियों को लेकर वो अधिकार एसएसपी दफ्तर रवाना हो गए।

कुछ दिन बाद पुलिस ने एक फोन टैप किया जिसमें श्री प्रकाश का गुर्गा उसे बताता है कि उसकी फोटो सारे अखबारों में छपी है। इस पर श्रीप्रकाश ने पूछा कि उसने क्या पहन रखा है। गुर्गे ने बताया कि उसने डेनिम की शर्ट पहन रखी है इस पर श्री प्रकाश ने जवाब दिया कि वो डेनिम की शर्ट इस वजह से नहीं पहनता क्योंकि डेनिम की शर्ट दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में पहनी जाती है और छोटे शहरों में इस तरह की शर्ट पहनने वाले लोगों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

पुलिस ने जब फोन ट्रेस किया तो पता चला कि श्री प्रकाश उस वक्त नेपाल में मौजूद था। अपनी फोटो मिलने से वो बेहद परेशान हो गया था। बस यहीं से श्री प्रकाश की आखिरी गिनती भी शुरु हो गई। हालांकि इसके बाद भी श्री प्रकाश ने कई वारदात को अंजाम दिया लेकिन आखिरकार वो केवल और केवल उसी फोटो की वजह से मारा गया।