राजस्थानः नीम के पेड़ से निकलते दूध की हो रही पूजा, जानिए क्या है हकीकत

नीम के करीब 200 पेड़ों के बीच केवल एक पेड़ से निकलती दूध जैसे पदार्थ की धार। आसपास बैठे कई लोग। कोई भजन गा रहा है तो कोई दीया जला रहा है। महिलाएं तो आंचल फैलाकर मन्नतें मांग रही हैं। जो भी इसके बारे में सुन रहा है, वह सीधा इसके दर्शन करने पहुंच रहा है। मामला झुंझुनूं जिले के पिलानी के बनगोठड़ी खुर्द का है। यहां बाबा गुगननाथ महाराज के आश्रम में पिछले 15 दिनों से एक नीम के पेड़ से तेजी से दूध जैसा पदार्थ निकल रहा है।

यह चर्चाएं सुनकर इसकी सच्चाई जानने के लिए मीडिया टीम बॉटनी एक्सपर्ट की विशेषज्ञ डॉ. स्मितांजलि मिश्रा को लेकर आश्रम पहुंची। वाकई में वहां एक पेड़ से दूध जैसे पदार्थ की धार निकल रही थी। आश्रम के महंत बाबा प्रेमनाथ महाराज ने बताया कि यहां दिन भर लोग आते हैं। दीया और अगरबत्ती जलाते हैं।

सब कुछ देखने के बाद डॉ. स्मितांजलि मिश्रा ने बताया कि यह कोई चमत्कार या दैवीय कृपा नहीं है। यह किसी भी पेड़ पौधे के इंफेक्टेड होने पर उसे सही करने का प्रकृति का अपना तरीका है।

आइए, समझते हैं क्या है सच्चाई–

पहले जानिए क्या है मामला?
पिलानी के समीप बनगोठड़ी गांव में बाबा गुगननाथ महाराज का आश्रम है। आसपास के कई गांवों के लोगों में इसके प्रति बड़ी आस्था है। आश्रम के महंत प्रेमनाथ ने करीब छह साल पहले यहां नीम के 200 पेड़ लगाए थे। 15 दिनों से इन पेड़ों के बीच केवल एक पेड़ से दूध जैसा लिक्विड निकल रहा है।

जंगल में किसी आग की तरह यह बात ना केवल बनगोठड़ी में बल्कि आसपास के कई गांवों में फैल चुकी है। इसके बाद पिलानी, चिड़ावा, सूरजगढ़, बेरी, रामपुरा, बहल सहित अन्य जगहों से आए श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा है। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और पूजा पाठ करने में जुटे हैं।

अब विशेषज्ञों से समझते हैं.. क्या है असली वजह?
मीडिया टीम के साथ मौके पर पहुंची पिलानी के इंद्रमणी मंड्रेलिया शिक्षा निकेत के वनस्पति शास्त्र (बॉटनी एक्सपर्ट) विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. स्मितांजलि मिश्रा ने बताया कि पेड़ की यह अवस्था एग्रोबैक्टिरियम टूमफेशियन्स (Agrobacterium Tumefaciens) है, जो कि एक तरह के संक्रमण की वजह से है।

पौधा या पेड़ जब इस तरह के बैक्टीरिया से संक्रमित होता है। तब इस प्रक्रिया से वह खुद के इन्फेक्शन को बाहर लाता है। इसके साथ ही ट्रीटमेंट की प्रक्रिया भी अपने आप शुरू हो जाती है। नमी के वातावरण में इसका प्रभाव अधिक होता है। जब नमी कम होगी तब इस तरह का लिक्विड निकलना अपने आप बंद हो जाता है।

इसी प्रकार झुंझुनूं डीएफओ राजेंद्र कुमार हुड्‌डा ने बताया कि सरल शब्दों में इसे ऐसे समझ सकते हैं- कोई पेड़ या पौधा रोग ग्रस्त होता है तो उससे इस तरह का लिक्विड निकलता है। इस प्रक्रिया के जरिए वह खुद को सही भी कर लेता है।

…तो फिर 200 में से केवल एक ही पेड़ में ऐसा क्यों
विशेषज्ञों के जवाब के बाद मौके पर कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि यहां लगे 200 पेड़ों में से केवल एक ही पेड़ से ऐसा पदार्थ क्यों निकल रहा है?

इसका जवाब वनस्पति शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. स्मितांजलि मिश्रा ने दिया। उन्होंने बताया कि जिस तरह हजारों में से कुछ ही लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं, वैसे ही वनस्पति पर भी यही नियम लागू होता है। सभी पेड़-पौधे एक साथ रोग ग्रस्त नहीं हो सकते।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि इससे पहले भी उत्तराखंड, ओडिशा सहित देश के अन्य स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए हैं। पेड़ से दूध की तरह का सफेद पदार्थ निकलते हुए देखा गया है।

सबसे जरूरी बात : ज्यादा पदार्थ पीना हानिकारक
कई लोग दूध जैसे इस पदार्थ को गिलास में भरकर घर ले जा रहे हैं। कई बार-बार इसका सेवन कर रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि इसका ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें कई बैक्टीरिया पाए जाते हैं।