यूपी भाजपा अध्यक्ष की रेस में ये 5 नाम, ‘ब्राह्मण’ चेहरे पर लगेगा दांव ?

भारतीय जनता पार्टी में कोई भी दायित्व कभी स्थायी नहीं रहा, एक तय कालखंड और तय समयसीमा के भीतर दायित्वों में फेरबदल होते रहता है। जिन प्रदेशों में हाल ही में चुनाव संपन्न हुए थे इन दिनों भाजपा उन राज्यों के प्रदेशों की कार्यकारिणी बदलने में लगी है। बीते शनिवार को उत्तराखंड के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को मुक्त कर पूर्व विधायक महेंद्र भट्ट को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसी क्रम में अब अन्य राज्यों के नए प्रदेश अध्यक्षों के नामों की अटकलें लगने लगी हैं जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है और इस बात की संभावना काफी तेज है कि उत्तर प्रदेश में किसी ब्राह्मण चेहरे को राज्य की कमान सौंपी जा सकती है।

कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है यानी यूपी ही केंद्र की राजनीति को तय करता है। यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह थे जिन्हें योगी सरकार में मंत्री बनाया गया है और साथ ही उनका प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है जिसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। यूं तो उत्तर प्रदेश में भाजपा 2014 के बाद से ही करिश्माई आंकडों को छूती हुई 2014 से 2022 तक लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करते आ रही है पर इस जीत को बरकार रखने के लिए भाजपा को अपने सबसे बडे मूल संगठन को जीवित रखना है। यही कारण है कि “एक व्यक्ति एक पद” के तहत अब स्वतंत्र देव सिंह के इतर अन्य नामों पर चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में जिन नामों पर विचार किया जा रहा है और जो संभवतः भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे हैं वे नाम आज हम आपको बताएंगे।

पहला नाम है दिनेश शर्मा का। वो योगी सरकार के पहले कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री थे। उससे पूर्व लखनऊ के महापौर भी रहे। योगी सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार थमाया गया जिनमें माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे मंत्रालय शामिल थे और इसके अतिरिक्त वो उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सदन के नेता भी थे। चूंकि वर्तमान में शर्मा के पास कोई संगठनात्मक दायित्व या सरकार के भीतर को ज़िम्मेदारी नहीं है ऐसे में ब्राह्मण नेता के रूप में भाजपा उनको नया प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है।

दूसरा नाम है सुब्रत पाठक का। सुब्रत पाठक वर्तमान में कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, उनका संगठनात्मक अनुभव भी बहुत प्रभावशाली रहा है। ऐसे में सपा के एक गढ़ कन्नौज से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को 2019 आम चुनावों में हराने वाले सुब्रत पाठक पहले से ही भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के दिमाग में अपनी जगह बना चुके हैं। सांसद बनने से पूर्व सुब्रत पाठक भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहें। यही कारण है कि बीते 2020 में उत्तर प्रदेश की राज्य भाजपा इकाई की नई कार्यकारिणी में भी सुब्रत पाठक का नाम था। अध्यक्ष के बाद भाजपा में अगला बडा पद महामंत्री का माना जाता है और तब पदोन्नति के साथ सुब्रत पाठक को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। ऐसे में अगर अगले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ब्राह्मण, संगठनात्मक अनुभव और सपा के किले को ढहाने वाले सुब्रत पाठक का चयन हो तो इसमें कोई अचंभे की बात नहीं होगी।

इस सूची में तीसरा नाम है बी एल वर्मा का। वो राज्यसभा सांसद हैं और बदायूं के रहने वाले हैं। वह जाति से ओबीसी और लोधी समुदाय से आते हैं और माना जा रहा है कि यदि भाजपा ओबीसी प्रदेश अध्यक्ष बनाने का मन बनाती है तो बी एल वर्मा के नाम पर ही मुहर लगेगी। वर्तमान में राज्यसभा सांसद बी एल वर्मा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री और भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।

चौथा नाम है अलीगढ से भाजपा सांसद सतीश गौतम का, जो पूर्व में दिल्ली एनसीआर में दूध का व्यवसाय किया करते थे। स्वयं को कल्याण सिंह का शिष्य बताने वाले सांसद सतीश गौतम इस बार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में आगे बने हुए हैं। सियासी गणित में ब्राह्मण होने के साथ ही सतीश गौतम को कल्याण सिंह के परिवार का साथ और संघ पृष्ठभूमि से आशीर्वाद मिलता रहा है। साथ ही अलीगढ़ जैसे क्षेत्र से लगातार बहुमत से जीतकर आना सतीश गौतम को एक प्रभावी नेता बना चुका है। ऐसे में सतीश गौतम का चयन भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में हो सकता है।

पांचवा नाम है बृज बहादुर उपाध्याय का। बृज बहादुर कासगंज ज़िला के ग्राम लुटसान सासनी के रहने वाले हैं। वो वर्ष 1980 में कासगंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक से लेकर 2022 तक संगठन के अनेकों उपक्रमों, प्रकल्पों और दायित्वों पर रहे और वर्ष 2020 में ही उन्हें प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष बनाया गया। ब्राह्मण और सगंठनात्मक रूप से परिपक्व बृज बहादुर उपाध्याय को भी संघ का करीबी होने और ब्राह्मण समीकरण के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

आपको बताते चलें कि यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण नामों की चर्चा इसलिए चल रही है कि क्योंकि प्रत्येक लोकसभा चुनाव के समय यूपी भाजपा के अध्यक्ष कोई न कोई ब्राह्मण नेता ही रहे हैं और 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान केशरीनाथ त्रिपाठी यूपी भाजपा अध्यक्ष थे।
2009 लोकसभा चुनाव के समय रमापति राम त्रिपाठी
2014 लोकसभा चुनाव के दौरान लक्ष्मीकांत वाजपेयी
2019 लोकसभा चुनाव के दौरान महेंद्र नाथ पांडेय प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

यूं तो दलित वर्ग से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं इटावा के सांसद रामशंकर कठेरिया भी इस दौड़ में हैं पर संभावित नामों में उपर्युक्त नाम आगे चल रहे हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि यूपी भाजपा का अगला अध्यक्ष कोई ब्राह्मण चेहरा ही होगा।