भगवान शिव की उत्पत्ति कैसे हुई, 99% लोगों को नहीं है सही जानकारी

हिन्दू धर्म में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सबसे बड़े देवता के रूप में पूजा जाता है | ऐसा कहा जाता है की यह तीन देवता अजर, अमर, अविनाशी है | इनका जन्म भी नहीं हुआ है यह तो ऊर्जा से स्वयं ही प्रकट हुए है | इन तीनो देवताओ में भगवान शिव की उत्पत्ति सदैव ही विवाद का विषय रहा है | आज हम आपको बतायेंगे की भगवान शिव की उत्पत्ति कैसे हुई है |

भगवान शिव के जन्म के बारे में विद्वान अनेक मत देते है | लेकिन हम आपको शास्त्रों में लिखी गयी बाते ही बतायेंगे | भगवान शिव की उत्पत्ति का सबसे बड़ा प्रमाण श्रीमद भागवत गीता में लिखा है | दुनिया जानती है की श्रीमद भागवत गीता की रचना स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने की थी | इसलिए इस मत पर कोई भी व्यक्ति प्रश्न चिन्ह नहीं लगा सकता है |

भगवान श्री कृष्णा ने महाभारत में अर्जुन को बताया था की एक बार विष्णु और ब्रह्मा को स्वयं पर अभिमान हो गया | उन्हें लगा की ब्रह्माण्ड में उनके अतिरिक्त कोई भी शक्ति ऐसी नहीं है | जो उनसे सर्वश्रेष्ठ हो | उसी समय अचनाक एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई | उस दिव्य ज्योति से आवाज आई की तुम दोनों में से कोई भी इस दिव्य ज्योति के दोनों छोर तक जायेगा | उसे सर्वश्रेष्ठ माना जायेगा |

भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा की हे अर्जुन ! विष्णु और ब्रह्मा ने बहुत कोशिश की, लेकिन उस दिव्य ज्योति का छोर ना ढूंढ पाये | इसके पश्चात् विष्णु समझ गये की यह कोई ज्योति नहीं बल्कि माया है | उन्होंने हार मान ली और वापस अपने उसी स्थान पर आ गये, जहाँ से उन्होंने चलना शुरू किया था | कुछ ही देर बाद ब्रह्मा भी वापस आ गये और कहा की उन्होंने इस दिव्य ज्योति का छोर ढूंढ लिया है | उसी समय भगवान शिव प्रकट हुये और उन्होंने ब्रह्मा को झूठा साबित किया | इस बात पर विश्वास इसलिए भी किया जा सकता है | क्योंकि यह बात भगवान विष्णु के 8वे अवतार कृष्ण ने कही है |

इसके अतिरिक्त श्रीमद भागवत गीता द्वापरयुग में लिखी गयी थी | इससे पहले और बाद में किसी भी ग्रन्थ में इस बात का वर्णन नहीं मिलता है | जो यह सिद्ध करता है की यह घटना सृष्टि की रचना होने से पहले की है | इस बात को भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने किसी को नहीं बताया था | अधिकांशतः इतिहासकार इसी बात पर विश्वास करते है |

जबकि विष्णु पुराण में कहा गया है की जिस प्रकार भगवान ब्रह्मा की उत्पत्ति विष्णु जी की नाभि से हुई है | उसी प्रकार भगवान शिव की उत्पत्ति विष्णु जी के मस्तिष्क के तेज से हुई है | इसलिए भगवान शंकर अधिकांशतः समय समाधी में लीन रहते है | लेकिन इस मत के बारे में कहा जाता है की यह पुराणों की बाते है और पुराणों की रचना किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा की गयी है | इसलिए इस बात पर पूर्ण रूप से विश्वास करने में शंका है | लेकिन वैष्णव धर्म को मानने वाले इसी बात का समर्थन करते है |