पाकिस्तानः आर्मी और इमरान के बीच खिंची तलवारें, जनरल बाजवा की फैमिली का टैक्स रिकॉर्ड लीक

पाकिस्तान में तलवारें खिंच चुकी हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना के बीच इस कदर मोहभंग हो चुका है कि दोनों के संबंध पूरी तरह से टूट चुके हैं. इमरान खान को शुरुआत में भले ही सेना ने प्रधानमंत्री बनाने में साथ दिया मगर अब उनके लोग न सिर्फ सेना समर्थित सरकार को बल्कि खुद सेना को भी भ्रष्ट बता रहे हैं. सरकार में इमरान के हमदर्दों ने एक वेबसाइट पर सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के परिवार के सदस्यों के टैक्स रिकॉर्ड लीक कर दिए हैं.

“डेटा-आधारित खोजी समाचारों पर काम करने वाला पाकिस्तान का एक डिजिटल मीडिया समाचार संगठन” फैक्ट फोकस ने अपनी वेबसाइट पर जनरल बाजवा के परिवार के टैक्स रिकॉर्ड प्रकाशित किए हैं. इसमें उनके रिश्तेदार की भी संपत्ति शामिल है. इसमें उनकी संपत्ति में आश्चर्यजनक वृद्धि दिखाया गया है. सेनाध्यक्ष (सीओएएस) के रूप में जनरल के कार्यकाल के छह वर्षों में उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अनुपात में यह कमाई कई गुना ज्यादा है.

29 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं बाजवा

सीओएएस के रूप में अपना दूसरा विस्तारित कार्यकाल पूरा करने के बाद बाजवा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि बाजवा को एक और विस्तार मिलेगा या वे अपने उत्तराधिकारी को नामित करेंगे जिसे सरकार नए सीओएएस के रूप में नियुक्त करेगी. फैक्टफोकस के अनुसार, बाजवा के कार्यकाल के दौरान उनके तत्काल और विस्तारित परिवार के सदस्यों ने कई नये अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुरू किये, विदेशों में पूंजी स्थानांतरित की और विदेशों में संपत्तियां भी खरीदीं.

सीओएएस की बहू बनने से नौ दिन पहले महनूर साबिर बाजवा की दौलत में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई और वह अरबपति बन गईं. साबिर की शादी सीओएएस के बेटे साद सिद्दीकी बाजवा से हुई है. बाजवा परिवार के स्वामित्व वाली संपत्ति में कुल वृद्धि की गणना 12.7 बिलियन पाकिस्तानी रुपये की गई है. आधिकारिक विनिमय दर पर अमेरिकी डॉलर अब 223 पाकिस्तान रुपये के बराबर है.

एक खुला रहस्य उजागर किया गया

इस खुलासे से जो कुछ पता लगा वह वही था जिसे पाकिस्तान में हर कोई जानता या संदेह करता है. पाकिस्तानी जनरलों को उनकी आधिकारिक आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के लिए जाना जाता है. इसमें रिटायरमेंट पर उन्हें भूमि के रूप में मिला उपहार भी शामिल है. सेना पाकिस्तान में एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाती है और सामूहिक रूप से देश का सबसे धनी उद्यमी है. वह अचल संपत्ति और रीयल एस्टेट से लेकर सीमेंट कारखाने और यहां तक कि बेकरी तक के कारोबार चलाती है.

खोजी पत्रकारों का समूह फैक्टफोकस बाजवा परिवार के सदस्यों के कर रिकॉर्ड तक पहुंचने में कामयाब रहा और उसे उन्होंने अपनी वेबसाइट पर डाल दिया. इसमें पाकिस्तान और विदेशों में उनकी लंबी-चौड़ी संपत्ति भी शामिल है. इस खुलासे का नतीजा इस्लामाबाद में भूकंप की तरह हुआ. सरकार ने घोषणा की कि वह दस्तावेज लीक करने वाले का पता लगाने के लिए अपने राजस्व विभागों में जांच शुरू कर रही है. हैरानी की बात यह है कि फैक्टफोकस लीक मामले में कोई बर्खास्तगी नहीं हुई.

फैक्टफोकस ने तोशखाना प्रकरण को भी उजागर किया

देश के सबसे डरावने और सम्मानित संस्थान के प्रमुख को बदनाम करने की कोशिश पर लोगों को तगड़ा झटका लगा. ये लीक उस समय हुए जब पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री के रूप में विदेशी सरकारों से मिले कुछ उपहारों को बेचने और कुछ अन्य को अपने पास रख लेने के आरोप में इमरान खान को दोषी पाया और चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया. तब इस मामले की सुनवाई लाहौर हाईकोर्ट कर रहा था. इमरान पर खुद ज्यादातर पैसे रख लेने का और सरकार के राज्स्व में काफी कम जमा करने का आरोप था.

तोशखाना प्रकरण भी फैक्टफोकस ने उजागर किया. इसमें इमरान खान ने एक अत्याधुनिक हैंडगन सहित कई उपहार बेचे जिनमें सऊदी से उपहार में मिली दस लाख की एक घड़ी भी थी. फैक्टफोकस पाकिस्तानी नेताओं के बीच कोई भेदभाव नहीं करता चाहे वह जनरल हों या राजनेता. वह सभी के भ्रष्ट आचरण को उजागर करता है.

सेना-पीटीआई में अलगाव

सेना और इमरान खान और उनकी पीटीआई के बीच खाई तब पैदा हुई जब इमरान प्रधानमंत्री थे और अपने चहेते फैज हमीद को आईएसआई प्रमुख के रूप में विस्तार देना चाहते थे. जनरल बाजवा हमीद की जगह लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम को यह पद देना चाहते थे और इमरान के तीव्र प्रतिरोध के बावजूद उन्होंने अपनी जिद पूरी की. इस प्रकरण के कारण सेना ने खुद को इमरान से दूर कर लिया और पीएमएल (नवाज), पीटीआई और जेयूआई के पीडीएम गठबंधन के करीब आ गई. इसी के बाद इस साल अप्रैल में अविश्वास मत के माध्यम से पीटीआई प्रमुख को सत्ता से बाहर कर दिया गया.

पाकिस्तान में देशव्यापी आंदोलन

इमरान खान ने तब अपने पीटीआई समर्थकों के साथ देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया. उन्होंने इन घटनाओं के लिए सेना को दोषी ठहराया और पीडीएम सरकार को बर्खास्त कर तत्काल चुनाव कराने की मांग की. उनके समर्थकों ने भी परोक्ष रूप से पीटीआई प्रमुख पर गोली चलाए जाने के पीछे सेना का हाथ होने का आरोप लगाया. हमले में इमरान खान के पैर में चोट आई. इमरान ने सेना को देश की राजनीति में दखल देने वाले एक पक्षपातपूर्ण संगठन के रूप में चित्रित करने में कामयाबी हासिल कर ली है.

उन्होंने अपने निष्कासन के लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया मगर बाद में यह आरोप वापस ले लिया. लेकिन इन सबका परिणाम यह हुआ कि पाकिस्तान में सबसे शक्तिशाली और लोकप्रिय संस्था सेना को अब इमरान के समर्थक न केवल देश की राजनीति में पक्षपातपूर्ण दखल देने वाले बल्कि भ्रष्ट भी बता रहे हैं.

25 नवंबर को इस्लामाबाद का घेराव

इमरान ने हाल के दिनों में सेना की अपनी आलोचना को कम किया है लेकिन दोनों के बीच भरोसा इतना टूट चुका है कि अब मेल-मिलाप की संभावना न के बराबर बची है. जनरलों के बीच अपने लोगों को बैठाने की पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कोशिश को सेना ने गंभीरता से लिया. राजनीति में दखल रखने वाली सेना नहीं चाहती कि उनके बीच का कोई आदमी सरकार का करीबी बन जाए. इमरान के समर्थक अब 25 नवंबर को इस्लामाबाद का घेराव करने वाले हैं. अपने पैर के घाव से उबर रहे इमरान खान अगले दिन उन्हें संबोधित करेंगे. कई संकटों, वित्तीय और राजनीतिक उठा-पटक में उलझे पाकिस्तान के लिए नवंबर का अंतिम हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है.