चीन का अगला निशाना है ‘चिकन नेक’, जानें कैसा करारा जवाब देगा भारत

लातों के भूत बातों से न आज तक मानें हैं और न ही मानेंगे। चीन इसी कथन को चरितार्थ करने में कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है। 2020 से अपनी करतूतों में दिन-प्रतिदिन वृद्धि कर रहे चीन ने एक बार फिर से सभी सीमाओं को लांघ दिया है। भारत से भिड़ंत के सभी पहलुओं के संकेत में, नई उपग्रह छवियों से अर्थात सैटलाइट से आई तस्वीरों से पता चलता है कि डोकलाम के पास भूटानी क्षेत्र में चीन द्वारा निर्मित एक गांव भारत पर घात करने के लिए ऐसे उपक्रमों का सहारा ले रहा है कि अब उसने पूरी तरह से भूटान के एक क्षेत्र में कब्जा कर लिया है और एक गांव का निर्माण कर वहां पूरी बसावट कर चुका है ।

दरअसल, नई उपग्रह छवियों से संकेत मिलते हैं कि डोकलाम से 9 किमी पूर्व में निर्मित एक चीनी गांव, जहां 2017 में भारतीय और चीनी सेना का सामना हुआ था, अब वहाँ लगभग हर घर के दरवाजे पर कार खड़ी होने के साथ वो क्षेत्र भरा हुआ है। गौरतलब है कि जिस गांव को बीजिंग पंगडा कहता है, वह भूटानी क्षेत्र में स्थित है।

पंगडा के साथ-साथ एक साफ-सुथरा चिह्नित ऑल-वेदर कैरिजवे है, जो भूटान में चीन के व्यापक भूमि-हथियाने का हिस्सा है। यह तेजी से बहने वाली अमो चू नदी के किनारे, भूटानी क्षेत्र में 10 किमी की कटौती करता है। चीन ने अमो चू नदी के किनारे गांव से एक मोटरवे का भी निर्माण किया है। यह चीन को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए एक सीधी रेखा प्रदान करेगा, जो भारत के पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से चिकन नेक से जोड़ता है।

इस गाँव का निर्माण करने के पीछे बड़ा उद्देश्य है। ये गांव चीन को निवासियों के बहिर्वाह को संतुलित करके कमजोर सीमा बल को मजबूत करने में मदद करेंगे और चीन को बेहतर सीमा निगरानी और चरवाहों के नेटवर्क के माध्यम से गश्त करने का वादा करते हैं। पिछले साल पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को एक रिपोर्ट में कहा था कि 2020 में चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और भारत के अरुणाचल प्रदेश के बीच एलएसी के पूर्वी क्षेत्र में विवादित क्षेत्र के अंदर चीन ने 100 घरों का एक बड़ा नागरिक गांव बनाया था।

भारतीय और चीनी सैनिक 5 मई, 2020 से पूर्वी लद्दाख में तनावपूर्ण गतिरोध में बंद हैं, जब पैंगोंग झील क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। लद्दाख गतिरोध को हल करने के लिए भारत और चीन ने अब तक 16 दौर की सैन्य वार्ता की है। पर वहीं इस बार यदि भारत की बात करें तो अनेकों दौर की बातचीत का कोई मतलब न निकलने के बाद भारत का रूख अब सख़्त हो चला है। यदि गलवान जैसा कृत्य दोहराने की लेश मात्र भी कोशिश इस बार हुई तो निस्संदेह अंजाम कुछ और ही देखने मिलेंगे चीन को।