गुजरात चुनावः BJP को इन 8 सीटों पर आजतक नहीं मिली जीत, जानिए कारण

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बीजेपी गुजरात की आठ विधानसभा सीटों पर गुजरात के निर्माण के बाद एक बार भी जीत पाने में कामयाब नहीं हो पाई हैं. इतना ही नहीं चार अन्य सीटों पर बीजेपी उपचुनाव में जीत सकी है लेकिन मुख्य चुनाव में बीजेपी कुल बारह सीटों पर जीत दर्ज करने में नाकामयाब रही है. गौरतलब है कि ये दर्जन भर सीटें अनुसुचित जन जाति बाहुल वाले हैं जहां बीजेपी पैठ बनाने में साल 1962 से लगातार नाकामयाब रही है जब गुजरात राज्य बनने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे.

इन सीटों पर अभी तक नहीं जीती BJP

गुजरात में साल 1998 से बीजेपी की लगातार जीत होती रही है लेकिन दर्जन भर सीटों पर बीजेपी मुख्य चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाई है. इन सीटों के नाम हैं. बोरसाद, आंकलव, झागडिया. व्यारा,भिलोड़ा, दानिलिमडा, और गरबडा जहां बीजेपी एक बार भी जीत पाने में नाकामयाब रही है. दरअसल गुजरात राज्य का निर्माण महाराष्ट्र से अलग होने के बाद साल 1960 में हुआ था.

यहां पहली बार विधानसभा का चुनाव का चुनाव साल 1962 में कराया गया था. साल 1962 से 1985 तक कांग्रेस का राज्य में पूर्ण रूपेण दबदबा रहा है लेकिन साल 1990 से बीजेपी सत्ता में आती रही है. राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन साल 1985 में बेहतरीन रहा है जब कांग्रेस 56 फीसदी मत पाकर रिकॉर्ड दर्ज की थी. राज्य में बीजेपी अभी तक कांग्रेस के रिकॉर्ड को तोड़ पाने में नाकामयाब रही है.

कांग्रेस का दबदबा एसटी बाहुल सीटों पर ज्यादा क्यों है ?

बोरसाद में कांग्रेस लगातार जीतती आ रही है. साल 1962 हलांकि अपवाद है लेकिन उसके बाद कांग्रेस का परचम लहराता रहा है. भरूच जिले के झगाडिया विधानसभा में कांग्रेस साल 1985 तक जीतती रही है और उसके बाद छोटूभाई वसावा झगडिया से सात बार जीते हैं . छोटूवाई वसावा छह बार जनता दल के टिकट पर और साल 2017 में एकबार भारतीय ट्राइबल पार्टी से जीते हैं.

यही हाल व्यारा विधानसभा का भी है जहां से दो बार साल 1990 और 1995 में कांग्रेस के बागी चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं. लेकिन इसके अलावा व्यारा से कांग्रेस लगातार जीतती रही है. इतना ही नहीं भिलोडा,महुधा,आंकलव,दानिलिमडा और गरबडा में बीजेपी एक बार भी जीत का स्वाद नहीं चख सकी है.

इन सीटों पर जीता उपचुनाव

साल 1967 और 1990 को छोड़ साबरकांठा जिले के खेदब्रह्मा में कांग्रेस ही हमेशा से विजयी रही है. बनासकांठा जिले के दांता विधानसभा और राजकोट के जसदान में बीजेपी सिर्फ उपचुनाव में जीत दर्ज कर सकी है.राजकोट के धोराजी विधानसभा में बीजेपी साल 1990 और 1995 में जीती थी जब बीजेपी गुजरात में दिन प्रतिदिन ताकतवर हो रही थी . साल 1998 के बाद पूरी ताकत से बीजेपी सरकार में आ चुकी थी लेकिन धोराजी विधानसभा में साल 2013 में ही उपचुनाव जीत सकी है.

दरअसल गुजरात की 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं लेकिन बीजेपी मुस्लिम के अलावा इन जनजातियों पर पकड़ बनाने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई है. साल 2017 में इन आरक्षित सीटों पर बीजेपी 8 वहीं कांग्रेस 15 जीत पाने में कामयाब रही थी. साल 2012 में बीजेपी ने अपने आंकड़ों में थोड़ा सुधार कर 10 सीटें जीतने में सफल रही थी लेकिन कांग्रेस का दबदबा तब भी कायम रहा और कांग्रेस 16 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. साल 2008 में हुए परिसीमन से पहले एसटी आरक्षित सीटों की संख्या 26 थी जिनमें बीजेपी 11 और कांग्रेस 14 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

क्यों नाकामयाब रही BJP ?

बीजेपी राज्य में पिछले 25 सालों से सत्ता में रही है लेकिन एसटी और मुसलमानों के बीच गहरी पैठ बनाने में नाकामयाब रही है. राज्य में कांग्रेस ने सरकार बनाने का फॉर्मूला ढ़ूंढ लिया है लेकिन साल 2022 में बीजेपी और कांग्रेस के सामने आम आदमी पार्टी भी मैदान में डटी हुई है. कहा जा रहा है कि राज्य में 15 फीसदी आबादी एसटी की है जिनमें पैठ बनाने के उद्देश्य से बीजेपी ने द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया है. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इन इलाकों में साल 2022 के चुनाव में गहरी पैठ बना पाती है या नहीं.