कर्नाटक: मंदिर कैंपस में गैर-हिंदू की नो एंट्री, जानें क्या कहते हैं नियम?

Karnataka Temple

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में कुक्के सुब्रमण्या मंदिर के आस पास गैर हिंदुओं की दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके लिए मंदिर परिसर में एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें हिंदू जागरण वेदिके ने प्रतिबंधों का ऐलान किया. अगले सप्ताह से शुरू होने वाले ‘चंपा षष्ठी’ उत्सव के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. पोस्टर में कथित रूप से लिखा गया है कि “कुक्के सुब्रमण्या मंदिर में चंपा षष्ठी त्यौहार मनाया जाने वाला है. इस दौरान मंदिर के आस पास गैर हिंदू समुदाय के लोगों के दुकानें और स्टॉल्स लगाने को प्रतिबंधित किया गया है.”

इस पोस्टर के संबंध में, ना ही कर्नाटक सरकार और ना ही बीजेपी ने कोई टिप्पणी की है. हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह के पोस्टर सामने आए हैं. इससे पहले मार्च महीने में दक्षिण कन्नड़ के दुर्गापरमेश्वरी मंदिर में भी अधिकारियों को गैर-हिंदू समुदाय के लोगों को स्टॉल्स लीज पर देने से मना किया गया था. इस तरह के बैनर चिकमंगलुरु के गोनीबीदू गांव में भी देखे गए, जहां गैर हिंदू व्यापारियों को सुब्रमण्येश्वरा मंदिर में कार्यक्रमों के दौरान स्टॉल्स लगाने से रोके जाने की मांग की गई थी.

कर्नाटक के कानून मंत्री ने दिया समर्थन

कर्नाटक के कानून मंत्री जेसी मधुस्वामी इस कदम का समर्थन करते दिखाई दिए. राज्य के विधानसभा में बोलते हुए, उन्होंने कहा, “कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 2002 में, नियम 12 के मुताबिक संस्था के पास स्थित भूमि, भवन या स्थल सहित कोई भी संपत्ति गैर-हिंदुओं को पट्टे पर नहीं दी जाएगी. इन नियमों का पालन करते हुए, पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं.” विपक्षी कांग्रेस ने बीजेपी पर समाज को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

मंदिरों में गैर हिंदुओं के व्यापार पर रोक, कानूनी तौर पर गलत

हालांकि कर्नाटक के कानून मंत्री ने जिस नियम का हवाला दिया है, उसमें इस तरह की बातें कहीं भी नहीं कही गई है कि गैर-हिंदू समुदाय के लोग मंदिर के आसपास दुकानें या स्टॉल्स नहीं लगा सकते. कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम मूल रूप से 1997 में तैयार किया गया था, लेकिन 2001 में लागू हुआ. इस कानून के लागू होने के बाद से ही यह विवादों में रहा. इसके बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगा दी थी, और कुछ नियमों को हटाने का निर्देश दिया गया था.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस एक्ट में ऐसा कहीं भी नहीं कहा गया है कि यह कानून गैर-हिंदुओं को मंदिर के आसपास दुकानें या स्टॉल्स लगाने से रोकता है. अधिनियम के तहत नियम, यानी, अधिनियम कैसे संचालित होगा, इससे निपटने के लिए माध्यमिक कानून, पहली बार 2002 में राज्य सरकार द्वारा बनाए गए थे, और इसमें 2012 में संशोधन भी देखे गए थे. कानून के कुछ नियमों से भ्रम की गुंजाइश भी पैदा होती है. कानून मंत्री ने जिस नियम 12 का जिक्र किया है, उसमें गैर-हिंदुओं के व्यापार करने और स्टॉल्स लगाने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है. नियम 12 सिर्फ मंदिर सेवकों और अर्चकों की नियुक्ति से संबंधित है

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