इनसाइड स्टोरी: ‘अरुणाचल’ कांड से ही मन बना लिये थे नीतीश, अब पिंड छुड़ाना है!

8 से 10 अगस्त के बीच बिहार की सरकार बदल गई। BJP के जो नेता दिल्ली में मंत्री की हैसियत से फ्लाइट में चढ़े थे, पटना पहुंचते-पहुंचते उनके पद के आगे ‘पूर्व’ लग गया। बिहार में सरकार के बदलाव की ये पटकथा सरकार के गठन के साथ ही शुरू हो गई थी। बस सही मौके और तेजस्वी के साथ कुछ मुद्दों पर सहमति का इंतजार किया जा रहा था। पढ़िए, नीतीश कुमार के रूठने, BJP के मनाने और तेजस्वी के साथ सरकार बनाने का पूरा घटनाक्रम….

दिसंबर 2020

अरुणाचल प्रदेश में JDU के 6 विधायकों को तोड़ने से शुरू हुआ मनमुटाव

बिहार में NDA सरकार के गठन का एक महीना भी नहीं हुआ था कि BJP ने JDU को पहला झटका दिया। BJP ने अरुणाचल प्रदेश में JDU के 6 विधायकों को तोड़कर अपने पाले में कर लिया। उस दौरान ही गठबंधन लगभग टूट के कगार पर पहुंच गई थी। JDU के लगभग सभी नेता इसके लिए तैयार भी हो गए थे। तब तल्ख रिश्ते को नीतीश कुमार ने संभाला। मनमुटाव और खटास की यहां से शुरुआत हुई।

दिसंबर 2020

लव जिहाद, NRC और CAA नजरअंदाज करने से बेचैन हुए नीतीश

अरुणाचल प्रदेश के बाद लोकसभा में नीतीश को नजरअंदाज किया जाना भी रास नहीं आया। तब यहां CAA, NRC और लव जिहाद का मामला गर्म था। BJP अपने हिसाब से अलग-अलग विषयों पर अपना पक्ष रख रही थी। नीतीश कुमार BJP के तर्कों से असहमत थे। बड़े से बड़े मुद्दे पर उनकी राय नहीं ली जा रही थी। हालात ये हो गए थे कि गृह मंत्री अमित शाह, ललन सिंह का फोन तक नहीं उठाते थे। इस घटनाक्रम ने नीतीश की बेचैनी बढ़ा दी।

जुलाई 2021

जब नीतीश कुमार ने RCP से कहा- तब जाइए नई बंडी सिलवा लीजिए

नीतीश कुमार केंद्र में समानुपातिक हिसाब से 4 मंत्री की मांग कर रहे थे। BJP ने पहले इनकार किया। इसके बाद मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में नीतीश को दरकिनार कर BJP ने RCP सिंह के साथ सेटिंग कर ली। RCP सिंह जब ये बात लेकर नीतीश कुमार के पास पहुंचे, तब उन्होंने बात करने से साफ इनकार कर दिया। 5 मिनट की मुलाकात में उन्होंने RCP सिंह से कहा कि जाइए तब बंडी सिलवा लीजिए। नीतीश कुमार ने एक साल के भीतर RCP सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

मार्च 2022

स्पीकर से विवाद के बाद अपमानित महसूस कर रहे थे नीतीश कुमार

विधानसभा में स्पीकर विजय सिन्हा के व्यवहार से नीतीश कुमार खुद को अपमानित महसूस करने लगे थे। इसके बाद गठबंधन तोड़ने का मन बना लिया। इसके बाद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। दोनों के बीच दो-तीन बार मुलाकात हुई। कई मुद्दों पर सहमति हुई। इसके बाद तेजस्वी कीइफ्तार पार्टी में शामिल होकर उन्होंने नए गठबंधन का स्पष्ट संदेश लगभग दे दिया था।

जुलाई 2022

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बयानबाजी ने BJP छोड़ने का दिया मौका

नीतीश कुमार जिस मौके की तलाश में थे, BJP के शीर्ष नेताओं ने अपने 7 मोर्चों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में वो मौका उन्हें दे दिया। पार्टी के छोटे नेता तो पहले ही शराबबंदी, PFI व कानून व्यवस्था के खिलाफ बयान दे रहे थे। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के क्षेत्रीय पार्टियों के अस्तित्व को मिटा देने के बयान ने नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव को साथ आने का रास्ता साफ कर दिया।

BJP ने नीतीश कुमार को मनाने की पूरी कोशिश की

BJP के एक कद्दावर नेता और सरकार में मंत्री रहे ऑफ द रिकॉर्ड ये स्वीकार करते हैं कि BJP से गलती हुई थी। इसे मनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। नीतीश कुमार की डिमांड पर प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव को बदल दिया गया था। धर्मेंद्र प्रधान केवल उनसे मुलाकात करने पटना पहुंचे थे। इतना ही नहीं विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी को बदलने की तैयारी भी शुरू हो गई थी। इसका आश्वासन भी नीतीश कुमार को दे दिया गया था, लेकिन आखिर में नीतीश कुमार नहीं माने।

किस योजना पर काम कर रहे नीतीश कुमार

JDU अब बिहार, झारखंड और UP चुनाव लड़कर BJP का नुकसान करने का प्लान बना चुकी है। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने साफ कर दिया है कि BJP को 2024 में सत्ता में आने से रोकने के लिए उन्हें बस 40 सीटों पर हराना है। JDU अभी से इसकी तैयारी में जुट गई है। JDU के एक बड़े नेता ने बताया कि पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में बिहार के साथ झारखंड और UP में भी चुनाव लड़ेगी। इसी योजना के तहत पार्टी ने झारखंड प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो को बिहार से राज्यसभा भेजा है।

तेजस्वी को बिहार की कमान सौंप नीतीश की केंद्र की राजनीति में

वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि इसमें कोई दो मत नहीं कि नीतीश कुमार अब बिहार की सियासत तेजस्वी को सौंपने की तैयारी कर चुके हैं। 2024 से पहले वो कभी भी बिहार को छोड़कर केंद्र की सियासत में जा सकते हैं। जितने मजबूत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार BJP के साथ थे, तेजस्वी के साथ उतने मजबूत वो नहीं रह पाएंगे, ये उन्हें भी पता है।