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NDA सहयोगी की PM मोदी को चुनौती, अपना दल महासचिव बोले- वाराणसी में हम लड़ेंगे चुनाव

केंद्र में भाजपा के सहयोगी और अपना दल ने आज 29 दिसम्बर को ग़ाज़ीपुर में हुई पीएम मोदी की रैली का बहिष्कार किया है। साथ ही अपना दल चीफ़ आशीष पटेल ने ये ऐलान किया है कि पार्टी आइंदा किसी भी सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रहेगी।

आशीष पटेल अपना दल के प्रमुख हैं और मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति हैं। उनके इस ऐलान के पीछे वजह बताई जा रही है, पीएम मोदी के स्वागत कार्यक्रमों से उनको दूर रखे जाने को।

कुछ पहले अनुप्रिया पटेल भी बीजेपी पर अपमानित करने का आरोप लगा चुकी हैं।

साथ ही योगी के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने भी मोदी की ग़ाज़ीपुर रैली से मुँह मोड़ते हुए आगे से मोदी-योगी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल न होने की बात कही है। ओमप्रकाश राजभर ने ऐसा करने के पीछे वजह बताई है- डाक टिकट पर महाराजा सुहेलदेव राजभर का पूरा नाम न होना।

राजभर के मुताबिक़, ये महाराजा सुहेलदेव का अपमान है। राजभर इससे पहले भी कई मौक़ो पर बीजेपी की मज़म्मत कर चुके हैं। वो खुले मंच से मोदी-योगी पर लगातार हमलावर रहते हैं, वो भी योगी की सरकार में मंत्री रहते हुए।

बहरहाल इस वक़्त सबसे ज़्यादा तल्ख़ तेवर हैं बीजेपी की सहयोगी अपना दल के, लगता है कि अपना दल, भाजपा ही नहीं बल्कि पीएम मोदी से भी आर-पार के मूड में है। अब उसने साफ़ कह दिया है कि, वो नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से अपना अपना उम्मीदवार उतारेगी। यानी अगर 2019 में पीएम मोदी चुनाव लड़ने के लिए फिर से बनारस को चुनते हैं तो उन्हें अपनी सरकार की अब तक की सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी का सामना करना पड़ेगा।

सिर्फ़ यही नहीं अपना दल चीफ़ आशीष सिंह पटेल का कहना है कि उनकी पार्टी ने 2014 के बाद से काफ़ी तरक़्क़ी की है। और पार्टी  इस बार ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

Times of India के मुताबिक़ अपना दल सुप्रीमो ने कहा, ‘हमने पहले ही 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, इनमें वाराणसी भी शामिल है।

इस तरह 2014 में बीजेपी के साथ मिलकर यूपी की 2 सीटों पर लड़ने वाले अपनी दल की ख़्वाहिश इस बार 9 सीटों पर लड़ने की है। जिसमें पीएम मोदी  की वर्तमान संसदीय सीट बनारस भी शामिल है।

अपना दल ने 7 जनवरी को राज्य स्तरीय मीटिंग बुलाई है जिसमें गठबंधन को लेकर फ़ैसला हो सकता है।

बीजेपी बिहार में भी रामविलास पासवान के आगे घुटने टेक चुकी और उनकी हर शर्त मान कर वहाँ 6 लोकसभा सीटे लोजपा को देने के लिए राज़ी बीजेपी को अब उत्तर प्रदेश में मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ रहा है, वो भी अपनों से।

अपना दल ने 7 जनवरी को राज्य स्तरीय मीटिंग बुलाई है जिसमें गठबंधन को लेकर फ़ैसला हो सकता है।

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