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शर्मनाक: जिस मुस्लिम फौजी ने कारगिल में देश के लिए जान लड़ाई, उसे विदेशी बताकर डिटेंशन कैंप भेजा गया

कारगिल युद्ध लड़ चुके सेना का पूर्व अधिकारी ‘विदेशी’ घोषित, हिरासत शिविर में भेजा गया- India TV

दो दशक पहले कारगिल युद्ध के नायक और पूर्व सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया है. इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर शिविर भेज दिया गया. जानकारी के लिए बताते चले   52 वर्षीय मोहम्मद सनाउल्लाह सीमा पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. सनाउल्लाह को विदेशियों के लिए बने न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किया है.

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन आर्मी में 30 साल तक अपनी सेवाएं दे चुके  पूर्व मुस्लिम फौजी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशियों के लिए बने न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) ने विदेशी घोषित किया. विदेशी घोषित होने के बाद सनाउल्लाह को परिवार सहित गोलपाड़ा के नज़रबंदी शिविर भेजा गया.  असम के कामरूप जिले के बोको पुलिस थाना क्षेत्र के गांव कोलोहिकाश के निवासी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर दिया. कामरूप जिले के अपर पुलिस अधीक्षक संजीब सैकिया ने बताया कि 2008 में सनाउल्लाह का नाम मतदाताओं की सूची में ‘डी’ (संदिग्ध) मतदाता के रूप में दर्ज किया गया था.

मिली जानकारी के मुताबिक बताते चले शिविर में जाने से पहले सनाउल्लाह ने वहां के पत्रकारों को बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं और उनके पास नागरिकता से संबंधित सारे कागजात भी हैं सनाउल्लाह ने जानकरी देते हुए बताया कि उन्होंने सेना में शामिल होकर तीस साल (1987-2017) तक इलेक्ट्रोनिक एंड मैकेनिकल इंजीनियर विभाग में सेवाएं दी हैं.

आगे उन्होंने कहा की उन्हें 2014 में राष्ट्रपति की तरफ से पदक भी मिल चुका है. वह बीते साल से सीमा पुलिस में बतौर सहायक उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत है. सनाउल्लाह के परिवारवालों ने बताया कि वह न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में अपील करेंगे.  सनाउल्लाह के चचेरे भाई अजमल हक ने बताया, ‘सनाउल्लाह ने 1987 में सेना जॉइन किया था। वह जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और करगिल युद्ध के समय वहीं पर थे. 2014 में राष्ट्रपति की तरफ से सर्टिफिकेट देकर जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर की पोस्ट पर प्रमोशन हुआ था.

गलत साल बताने पर घोषित हुए विदेशी?

सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए मोहम्मद अजमल हक ने बताया कि असम में जन्म के बीस साल बाद 1987 में सनाउल्लाह सेना में शामिल हुए थे. वह 2017 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सीमा पुलिस में शामिल हो गए. उन्होंने (सनाउल्लाह) एक सुनवाई में गलती से 1978 में सेना में शामिल होने का उल्लेख किया.

अजमल हक के मुताबिक,  ‘इस गलती के आधार पर न्यायाधिकरण ने उन्हें (सनाउल्लाह) विदेशी घोषित किया है. सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने कहा था कि कोई भी 11 साल की उम्र में सेना में शामिल नहीं हो सकता है.’ अजमल हक को भी न्यायाधिकरण द्वारा नोटिस दिया गया था.

असम में 125,333 डी-वोटर, ऐसे मिल सकती है भारतीय नागरिकता

असम के संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटोवेरी ने कुछ महीने पहले राज्य विधानसभा में एक रिपोर्ट पेश की थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में 125,333 डी-वोटर (चुनाव आयोग द्वारा चिह्नित संदिग्ध मतदाता) हैं और न्यायाधिकरणों को भेजे गए 244,144 मामलों में से 131,034 का निपटारा कर दिया गया है.

इस बीच एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने एक अधिसूचना में कहा कि मतदाता सूची में ‘डी’ के रूप में चिह्नित मतदाताओं को एनआरसी में शामिल किए जाने पर विचार किया जाएगा, यदि वह अदालत से भारतीय घोषित होने का प्रमाण पत्र ले आते हैं.

 

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