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ईमानदारी की मिसाल हैं रघुराज तोमर, 4 बार विधायक रहने के बावजूद नहीं बना सके अपना घर

लगातार 4 बार विधायक बनना कोई आसान बात नही है और उससे भी बड़ी बात है पूरी इमानदारी के साथ अपने कर्तव्यो का निर्वाहन करना. आजकल ऐसे नेताओं की कल्पना करना बहुत मुश्किल का काम है. लेकिन एक नेता ऐसे हैं जिन्होंने अपनी विधायक पद का इस्तेमाल कभी अपनी भलाई के लिए नही किया. वो हैं खंडवा से विधायक रहे रघुराज सिंह तोमर.

रघुराज सिंह तोमर 1977 से 1980, 1980 से 1985, 1990 से 1992 और 1993 से 1997 तक विधायक रहे. फिर भी लगातार विधायक बनने के बाद भी उन्हें 2003 में पार्टी की तरफ से टिकट नही दिया गया. टिकेट देने के एवज में उनसे 14 लाख रुपये मांगे गए जिसके लिए ईमानदार तोमर ने इनकार कर दिया. उन्हें टिकट नही दिया गया.

रघुराज सिंह तोमर का इतने साल विधायक रहने के बाद भी हालात यह है कि वह अपने घर का टिन तक नही बदलवा पाए हैं. उनके घर की हालत काफी खस्ताहाल है. उनके घर के बाहर यादों के रूप में खड़ी है बैंक लोन लेकर खरीदी गयी एक जीप जिसपर आज भी विधायक की तख्ती लगी है जो उनको सुनहरे दिनों की याद दिलाती रहती है. रघुराज सिंह तोमर को पेंशन के रूप में 35 हजार रूपए मिल रहे हैं जिसे वह अपने इलाज और अपने पोता-पोती की पढाई पर खर्च कर रहे हैं. उनके बेटे नारायण सिंह एक किसान है जो उन्ही के साथ रहते हैं.

विधायक रहते हुए रघुराज सिंह तोमर ने हमेशा आमजन की समस्याओं को सरकार के सामने उठाने का काम किया. अपनी सरकार के खिलाफ भी उन्होंने आमजन के मुद्दों को लेकर अनशन किया. विधायक रहते हुए उन्होंने अपने लिए 1 इंच भी जमीन नही खरीदी. उन्होंने बताया कि कई बार जब उन्होंने आमजन का मुद्दा विधानसभा में उठाया तो उन्हें रिश्वत का ऑफर दिया गया लेकिन उन्होंने कभी भी रिश्वत लेकर अपने मुद्दों को पीछे नही होने दिया.

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