धर्म

पितृपक्ष में नई वस्तुएं खरीदना शुभ है या अशुभ, जानिए इसके पीछे की वजह

श्राद्ध का अर्थ है कि अपने देवों, परिवार, वंश परंपरा, संस्कृति और इष्ट के प्रति श्रद्धा रखना। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि जो स्वजन अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं चाहे वे किसी भी रूप में अथवा किसी भी लोक में हों, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, वह श्राद्ध है।

इस बीच बताते चले पितरो के श्राद्ध का समय व्यापारियों के लिए सबसे मंदा समय माना जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है की श्राद्ध के समय मैं कोई भी नई वस्तु खरीदना शुभ नहीं माना जाता है इसलिए इस समय मैं लोग बहुत कम खरीददारी करते है | क्या आप भी इस मान्यता को मानते है | लोगो का ऐसा मानना है की इस समय कोई भी नई वस्तु खरीदने से पितृगण नाराज हो जाते है इसलिए लोग इस समय मैं कुछ भी खरीदना सही नहीं मानते है | आईये जानते है क्या कारण है इन मान्यताओं के पीछे…

पितृपक्ष मैं कुछ भी खरीदना इसलिए मानते है अशुभ 
कुछ विद्वानों का कहना है की पितृपक्ष के समय मैं हमारे पूर्वज स्वर्गलोक से धरती की और अपने परिवार को देखने आते है इस समय के दौरान हमारा भी ध्यान अपने पूर्वजो की और ही होना चाहिए यदि इस समय मैं हम नई वस्तुओं को खरीदेंगे और हमारा ध्यान उन वस्तुओं की और चला जायेगा तो हम अपने पूर्वजो की तरफ ध्यान नहीं दे पाएंगे और हमारे पूर्वज हमसे नाराज हो जायेंगे इसलिए इस समय मैं नई वस्तुओं को खरीदना अशुभ माना जाता है |
दूसरी मान्यता ये है की ऐसा माना जाता है की ये समय पितरो का ऋण चुकाने का समय होता है इसलिए हमें पितृपक्ष मैं सिर्फ अपने पितरो पर ही ध्यान लगाना चाहिए क्योंकि हम पितरो के ऋण मैं डूबे हुए है और ये समय अपने पितरो के ऋण चुकाने का समय है नाकि नई वस्तुए खरीदने का समय | इसलिए ये समय नई वस्तुए खरीदने के लिए अशुभ माना जाता है |
इसलिए होता है शुभ 
 
 
कुछ विद्वानों का मानना ये है की इस समय हमारे पितर धरती पर आते है और हमें नई वस्तुओं के साथ देखकर खुश होते है वो तो हमें खुश देखना चाहते है इसलिए इस समय को नई वस्तुए खरीदने के लिए शुभ माना जाता है |

माना जाता है कि सावन की पूर्णिमा से ही पितर मृत्यु लोक में आ जाते हैं और नवांकुरित कुशा की नोकों पर विराजमान हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में हम जो भी पितरों के नाम का निकालते हैं, उसे वे सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी के अनुसार श्री गजानन की विदाई के बाद श्राद्धपक्ष शुरू हो जाएगा। इस बार श्राद्ध पक्ष 16 दिन का होगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार श्राद्ध पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर तक रहेगा। इस समय पितृ पक्ष और पित्तरों की मुक्ति के लिए कार्य किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं किए जाने से घर की तरक्की में बाधा उत्पन्न होने लगती है। इस कारण पितृ पक्ष में पित्तरों को खुश करना अनिवार्य होता है।

पितृ पक्ष के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस समय पित्तरों के लिए तर्पण एवं पिण्ड दान करने से पित्तरों की आत्मा को मुक्ति व शांति मिलती है।

पितृपक्ष की श्राद्ध तिथि 2019

  • 13 सितम्बर -पूर्णिमा श्राद्ध
  • 14 सितम्बर-प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
  • 15 सितम्बर-द्वितीया तिथि का श्राद्ध
  • 17 सितम्बर-तृतीया तिथि का श्राद्ध
  • 18 सितम्बर-चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
  • 19 सितम्बर-पंचमी तिथि का श्राद्ध
  • 20 सितम्बर-ख़ष्ठी तिथि का श्राद्ध
  • 21 सितम्बर-सप्तमी तिथि का श्राद्ध
  • 22 सितम्बर-अष्टमी तिथि का श्राद्ध
  • 23 सितम्बर-नवमी तिथि का श्राद्ध
  • 24 सितम्बर-दशमी तिथि का श्राद्ध
  • 25 सितम्बर-एकादशी तथा द्वादशी तिथि का श्राद्ध। संतों तथा महात्माओं का श्राद्ध
  • 26 सितम्बर-त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
  • 27 सितम्बर-चतुर्थी का श्राद्ध
  • 28 सितम्बर-अमावस्या, सर्व पितृ श्राद्ध रहेगा।
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