देश

जिस ख्वाहिश में कीर्ति आजाद ने बदला पाला, वो कांग्रेस में भी न हुई पूरी !

Kirti azad

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि देश में आज दो विचारधाराओं की लड़ाई लड़ी जा रही है। एक तरफ भाजपा, नरेंद्र मोदी और आरएसएस की विचारधारा जो देश को बांटने, नफरत फैलाने की विचारधारा है और दूसरी तरफ कांग्रेस की भाईचारा, प्यार और लोगों को जोड़ने की विचारधारा।

लोकसभा चुनाव-2019 में जिले के सूरतगढ़ कस्बे से चुनावी शंखनाद करने आए राहुल गांधी ने सीएम अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट की मौजूदगी में कहा कि पिछले पांच साल से नरेंद्र मोदी देश में दो हिन्दुस्तान बनाने में लगे हुए हैं। एक हिन्दुस्तान अमीरों का, अनिल अम्बानी और प्राइवेट जहाज वाला हिन्दुस्तान और दूसरी तरफ किसानों का, छोटे दुकानदारों, मजदूरों, माताओं-बहनों और बेरोजगार युवाओं का। एक धंधे में दो धंधे नहीं हो सकते। एक हिन्दुस्तान होना चाहिए और सब लोगों के लिए एक हिन्दुस्तान में ही जगह होनी चाहिए। दो हिन्दुस्तान हम नहीं बनने देंगे।

दरभंगा सीट को लेकर दो प्रमुख घटक दल आमने-सामने नजर आ रहे

इस बीच बताते चले बिहार के विपक्षी महागठबंधन में दरभंगा सीट को लेकर दो प्रमुख घटक दल आमने-सामने नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जहां दरभंगा सीट पर अपना दावा जता रहा है, वहीं कांग्रेस कीर्ति आजाद को मौजूदा सांसद बताकर यह सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। राजद के प्रवक्ता भाई वीरेंद्र तो दरभंगा से टिकट तय कर लिए जाने का दावा कर रहे हैं। राजद प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा कि दरभंगा सीट से राजद ही चुनाव लड़ेगा और पार्टी इस सीट के लिए राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी का टिकट फाइनल कर दिया है।

इधर, सिद्दीकी कहते हैं कि सीट पर दावेदारी करने का हक सभी को है। उम्मीदवार कौन होगा, यह तो महागठबंधन के शीर्षस्थ नेता ही तय करेंगे। इधर, कांग्रेस भी मिथिलांचल की इस प्रमुख सीट पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ना चाहती है। हाल ही में सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा का साथ छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया था और उनके नाम की ही चर्चा है कि कांग्रेस के टिकट से वही चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस के प्रवक्ता राजेंद्र राठौड़ कहते हैं 

दरभंगा पर कांग्रेस का दावा स्वभाविक है। कीर्ति आजाद न केवल सिटिंग सांसद हैं बल्कि उनका पूरा परिवार ही कांग्रेसी है।उल्लेखनीय है कि महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी इस सीट से चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस सीट का दावा छोड़ दिया। सूत्रों का कहना है कि सहनी अब खगड़िया से चुनाव मैदान में उतरना चाह रहे हैं।

बिहार के कद्दावर कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के पुत्र तथा मशहूर क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने 2009 और 2014 में भी जीत हासिल की। दोनों चुनावों में भी उन्होंने अशरफ फातमी को पराजित किया। बाद में भाजपा नेतृत्व से कीर्ति आजाद की ठन गई और उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। ऐसी स्थिति में दरभंगा सीट को लेकर महागठबंधन की गांठ फंसी हुई है।

Back to top button