देश

लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन, यकीन न हो तो पूछ लीजिए इन रजवाड़ों से

भोपाल । लोकसभा चुनाव की गुरुवार सुबह हुई मतणना में जहां पूरा देश भगवामय हो गया है, तो दूसरी ओर कई राज्‍यों से यूपीए का सफाया भी हो गया है। सबसे ज्‍यादा दिलचस्प बात यह है कि इस बार के आम चुनाव में जनता ने मध्‍यप्रदेश के राजा-महाराजाओं को भी नहीं बख्‍शा है, बल्कि बाहर का रास्‍ता दिखा दिया है। कहावत है कि प्रजा के आगे कभी न कभी राजा को सिर झुकाना ही पड़ता है और प्रजा ने आज यह कर दिखाया गया है और राजा-महाराजाओं को सिर झुकाना पड़ा है।
बात कर रहे हैं गुना-अशोकनगर सीट की, जहां से सांसद व ग्‍वालियर राजघराने से ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस चुनाव में हालत पतली नजर आ रही है। रूझानों में इस समय काफी पीछे चल रहे हैं। इन्‍हें भाजपा के उम्‍मीदवार के.पी. यादव टक्‍कर दे रहे हैं। सिंधिया करीब एक लाख से अधिक वोटों से पीछे चल हैं। बताया जा रहा है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव हार जाते हैं तो वे सिंधिया राजवंश के पहले ऐसे सदस्य होंगे जो चुनाव हारे। इस राजवंश से कोई भी सदस्य गुना और ग्वालियर संसदीय सीट से चुना नहीं हारा है।
वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद 2002 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से लड़े। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया 2002 से 2014 के बीच हुए सभी लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं। मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री व राघवगढ़ राज घराने तात्‍लुक रखने वाले राजा दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने इस बार भोपाल लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था जिससे यह सीट देश की चर्चित सीट बन गई थी, राजनैतिक माहौल को देखते हुए भाजपा ने भी नहले पे दहला मारते हुए साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को उम्‍मीदवार बनाया था । गुरुवार सुबह हुई मतगणना में शुरूआती रूझानों में ही साध्‍वी प्रज्ञा ने बढ़त बना ली थी और दोपहर होते-होते करीब दो लाख वोटों से आगे हो गई। फिलहाल, वे तीन लाख से अधिक मतों से आगे हैं। कुल मिलाकर यह है कि भोपाल और गुना दोनों सीटों पर भाजपा अपनी बढ़त बनाए हुए हैं।
Back to top button