उत्तर प्रदेश

काशी में कांड: ‘विकास’ के लिए काशीनाथ मन्दिर में तोड़फोड़, मलबे में मिलाए शिवलिंग

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वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में  विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण योजना के तहत श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम शुरू हो चुका है.  विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में हो रही तोड़-फोड़ से निकलने वाले मलबे को जहां तहां फेंके जाने की आशंका अब मूर्त रूप में सामने आने लगी है। इन मलबों को नालों के समीप फेंकने का काम शुरू हो गया है। इन मलबों का उपयोग गहरे गड्ढे वाले प्लाट को भरने में इस्तेमा किया जा रहा है। कॉरिडोर के रास्ते में आने वाली इमारतों को तोड़ा जा रहा है. यहां लंका थाना क्षेत्र के रोहित नगर में तोड़फोड़ के दौरान इमारतों के मलबे में बहुत से शिवलिंग भी पड़े दिखे. इससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी फैल गई. सूचना मिलने पर स्थानीय लोग और संत भी वहां पहुंचे, जिन्होंने विरोध जताया.

बता दें कि श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के तहत विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में व्यापक पैमाने पर तोड़-फोड़ की प्रक्रिया चल रही है। मंदिर प्रशासन युद्ध स्तर पर इस अभियान में जुटा है। यहां यह भी बता दें कि कॉरिडोर के लिए पुरानी काशी यानी पक्‍का महाल के अब तक खरीदे गए करीब 175 भवनों को ध्‍वस्‍त करने के लिए करीब तीन हजार मजदूर लगाए गए हैं। मणिकर्णिका व ललिता घाट से विश्वनाथ मंदिर तक 40-40 फीट के दो कॉरिडोर बनाने के काम इन दिनों जोर शोर से चल रहा है। खास तौर पर विध्वंस का काम रात में ही चलता है। रात में ही इन मलबों को उठाया जाता है और खच्चरों से सड़क पर लाने के बाद ट्रैक्टर से इसे जहां-तहां ले जाया जाता है। मलबा हाटने का काम ठेके पर दिया गया है। इसकी देखरेख बिल्कुल नहीं होती कि मंदिर परिक्षेत्र से किस तरह का मलबा निकल रहा है और उसे कहां गिराया जा रहा है। ऐेसे में ठेकेदार जहां चाह रहे हैं वहां ये मलबा गिरा दिया जा रहा है। बता दें कि जिस क्षेत्र से ये मलबा निकाला जा रहा है वहां सैकड़ों छोटे-बड़े मंदिर भी हैं। खास तौर पर कदम-कदम पर शिवलिग हैं।

पार्टी और क्षेत्रीय नागरिकों संग बैठक कर होगा जनविरोधः सपा पार्षद
ऐसा ही मलबा मंगलवार की रात में असि नाले के करीब जमीन खरीद कर बनाए गए प्लाटों के गड्ढों को भरने के लिए गिराया गया था। बुधवार की सुबह इस मलबे को देखते ही क्षेत्रीय नागरिक भड़क गए। मौके पर काफी लोग पहुंच गए। क्षेत्रीय पार्षद कमल पटेल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह शायद काशी के इतिहास में पहला मौका है जब इस तरह से इस मंदिर परिक्षेत्र का मलबा नाले के समीप गिराया जा रहा है। ये मलबा कौन गिरा रहा है यह भी पता नहीं। उन्होंने कहा कि एक तो मंदिर परिक्षेत्र को ध्वस्त कर नया कॉरिडोर बनाया जा रहा। दूसरी तरफ वहां जो तोड़फोड़ हो रही है उससे निकलने वाले मलबे को जहां-जहां तहा गिराया जा रहा है इसका पार्टी पुरजोर विरोध करेग।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले ही जताई थी आशंका
यहां यह भी बता दें कि मंदिर बचाओ अभियान का नेतृत्व कर रहे श्री विद्या मठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले ही इसकी आशंका जताई थी। कहा था कि पूर्व की भांति मंदिर परिक्षेत्र के मलबों को जहां तहां गिराया जाएगा। पहले भी मंदिर प्रशासन ऐसा कर चुका है। उनका आरोप था कि रानी भवानी मंदिर और ताड़केश्वर मंदिर से निकले मलबों को भी ऐसे ही असि नाले के समीप फेंका गया था।

मंदिर परिक्षेत्र से निकले मलबे के ढेर को छिपाने का प्रयास

इस संबंध में मंदिर बचाओ अभियान से जुड़े आम आदमी पार्टी के पूर्वांचल संयोजक संजीव सिंह ने कहा कि असि नाले के समीप रोहित नगर में गिराए विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के पवित्र मलबे की जानकारी होते ही प्रशासन उसे छिपाने में जुट गया है। कहा कि इस मामले में जहां मुकदमा दर्ज होना चाहिए मलबा गिराने वाले पर वहीं पुलिस उसे बचाने में जुट गई है।

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