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ऐसा देस है मेरा: पुलवामा के जिस गांव में सिर्फ 1 हिंदू परिवार, वहां मुस्लिमों ने किया शिव मंदिर का जीर्णोद्धार

पुलवामा आतंकी हमले के दो दिन बाद इसी जिले के एक गांव में सांप्रदायिक समरसता की एक नई इबारत लिखी गई. पुलवामा के अच्छन गांव में एक कश्मीरी परिवार के लिए मुस्लिम समुदाय ने मिलकर सदियों पुराने शिव मंदिर का जीर्णाद्धार किया. सोमवार को शिवरात्रि के अवसर पर हिन्दू परिवार ने इसी मंदिर में पूजा-अर्चना की, जिसमे मुस्लिम परिवारों ने भी शिरकत की.

हमले से 15 किलोमीटर की दूरी पर गांव

पुलवामा आतंकी हमले के बाद से कश्मीर का माहौल बिगड़ा हुआ है और आए दिन सुरक्षाबलों-आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबरें आती रहती हैं. इन्ही सब के बीच पुलवामा आतंकी हमले से 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा गांव अच्छन सांप्रदायिक समरसता का प्रतीक बन गया है.

गांव में मात्र एक कश्मीरी पंडित परिवार

पुलवामा के इस गांव में मुस्लिम और कश्मीरी पंडित हमेशा से समरसता के साथ रहे हैं. आतंकवाद बढ़ने के बाद कश्मीरी पंडितों को यहां से पलायन करना पड़ा था. पलायन के बाद कश्मीर की हालात बदल गए. कश्मीर में अब गिने-चुने कश्मीरी पंडित परिवार बचे हैं. अच्छन गांव में भी एक समय 90 परिवार रहा करते थे. अब एटीएम गार्ड संजय कुमार शर्मा और उनके तीन भाई अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं. ये इस गांव का अब इकलौता कश्मीरी पंडित परिवार है.

हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार

अच्छन गांव का शिव मंदिर करीब 80 साल पुराना है. यह काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुका था. संजय कुमार के लिए अकेले इसका जीर्णोद्धार कर पाना आसान नहीं था. ऐसे में गांव के मुस्लिम परिवार उनकी मदद करने के लिए आगे आए. अब पूरे गांव के सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार पूरा हो पाया.

1995 में मंदिर में आग लगा दी गई थी

शर्मा ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए औकाफ समिति ने सरकारी दफ्तरों तक बात आगे पहुंचाई. शर्मा ने कहा “हमें उम्मीद है कि पूरे राज्य से लोग मंदिर में फिर से आएंगे जैसा कि पहले होता था. हम यहां आने वालों के लिए दावतें देते थे और प्रार्थना करते हैं फिरसे ऐसा हो सके.” पंडित परिवार ने बताया कि मंदिर को 1995 में उपद्रवियों ने आग लगा दी थी. ऐसा कश्मीर में बढ़े हुए तनाव के बाद हुआ था. जिसमे सुरक्षाबलों ने चुरार-ए-शरीफ की सूफी दरबार को जला दिया था, इस दरगाह में आतंकियों ने शरण ले रखी थी.

औकाफ समिति के प्रमुख ने बताया

स्थानीय औकाफ समिति के प्रमुख मीर नजीर अहमद, जोकि मुस्लिम धार्मिक स्थलों का प्रबंधन देखते हैं ने बताया कि “लोग उनके समारोह में शामिल हुए. पंडित परिवार ने केहवा (कश्मीरी चाय) परोसी और मिठाइयां भी बांटी. हम सभी ने इसका आनंद लिया.” औकाफ समिति के प्रमुख ने ये भी बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार पुलवामा आतंकी हमले के दो दिन बाद 16 फरवरी को शुरु हुआ था और कई गांव वालों ने इसमें मदद की.

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