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यहाँ है मर्दों को मोटी बीवी की तलाश, औरतों को मजबूरन करना पड़ता है ये काम !

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कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है. ज्यादातर ऐसी खबरें हैरानी में डाल देती है. हैं, जिनके बारे में जानकर सबका जायदा टार लोग हैरान हो जाते है. ये भी ऐसा ही मामला है जिसे जानकर लोग अब भी हैरान  है

अफ्रीका का एक देश ऐसा भी है जहां पर महिलाओं को आकर्षक बनाने के लिए एक दिन में 16,000 तक कैलोरी की भारी-भरकम डाइट लेने पर मजबूर किया जाता है. ‘चैनल्स 4 अनरिपोर्टेड वर्ल्ड’ की नई डॉक्यूमेंट्री में यह चौंकाने वाली कहानी सामने आई है.

मॉरीटेनिया में लड़कियों का मोटा होना संपन्नता और खूबसूरती का सबसे बड़ा पैमाना है और इस पैमाने के अनुरूप ढलने के लिए लड़कियों को तमाम तरह के अमानवीय हथकंडों से होकर गुजरना पड़ रहा है.

 

मॉरीटेनिया में दो महीने का एक ‘फीडिंग सीजन’ होता है जिसमें 11 साल की लड़कियों को मोटा करने के लिए ऊंट का दूध, पॉरिएज जैसी चीजें खिलाई जाती हैं ताकि वह वजन बढ़ा सकें और पुरुषों के लिए आकर्षक बन सकें. फीडिंग सीजन में किलो-किलो तक दूध और पॉरिएज खिलाया जाता है.

दुखद ये है कि लड़कियों की मां ही उन्हें जबरदस्ती खाने पर मजबूर करती हैं. चाहे खाते-खाते उनका पेट दर्द करने लगे और उनका खाने का बिल्कुल मन ना करे, फिर भी लड़कियों को जबरदस्ती खाना खिलाया जाता है.

मांएं ऐसा इस उम्मीद में करती हैं कि उनकी बेटी पुरुषों को ज्यादा आकर्षित लगेगी और उसकी शादी करने में आसानी होगी.
गरीब परिवारों में जब खाने की कमी होती है तो वहां और भी ज्यादा खतरनाक तरीका अपनाया जाता है. वे अपनी बच्चियों को जानवरों को मोटा करने वाले कैमिकल का सेवन करने पर मजूबर करते हैं.

अगर खाना पर्याप्त हो तब भी परिवार के कुछ सदस्य बिना खाए रह जाते हैं ताकि उनके घर की लड़कियों को ज्यादा से ज्यादा खाना मिल सके.

मॉरीटेनिया में करीब एक-चौथाई लड़कियों को ज्यादा खाने पर मजबूर किया जाता है. गांवों में तो हालत और भी ज्यादा बदतर है. इतनी ज्यादा कैलोरी की डाइट लेने से बच्चियों को डायबिटीज, हार्ट की बीमारियां और किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है.
11 साल की मोने और उसकी दोस्त हेंदू पहली बार फीडिंग सीजन में शामिल हो रही हैं.
मोने ब्रेकफास्ट में 3000 कैलोरी, लंच में 4000 कैलोरी और डिनर में 2000 कैलोरी (कुल 9000 कैलोरी) ले रही हैं जबकि एनएचएस के मानकों के मुताबिक 10 साल की बच्चियों के लिए 1900 कैलोरी की खुराक पर्याप्त है.

स्लिम-ट्रिम मोने का अपनी उम्र के हिसाब से BMI सामान्य है लेकिन वह खुद को आकर्षक नहीं मानती है. वह कहती हैं, ‘मैं मोटी होना

चाहती हूं, मैं स्किनी नहीं दिखना चाहती हूं. जब मैं मोटी हो जाऊंगी तो खूबसूरत लगने लगूंगी.’
मोने की मां तहयेह एक खास टेंट बना रही हैं जिसमें लड़कियों को दो महीनों के लिए रखा जाएगा और खूब खाना खिलाया जाएगा
फीडिंग सीजन में लड़कियों को सबसे पहले एक लीटर ऊंट का दूध पीना पड़ता है और फिर उसके बाद पॉरिज और कॉसकस खाना पड़ता है. 3000 कैलोरी के ब्रेकफास्ट को पचाने के लिए उन्हें सिर्फ दो घंटे का वक्त दिया जाता है.

यहां मर्दों को चाहिए मोटी बीवी, केमिकल पीने को मजबूर हैं लड़कियां!

एक घंटे बाद मोने और हेंदू 4000 कैलोरी वाला लंच करते हैं. हेंदू की मां फातिमातऊ एक डंडा लेकर खड़ी रहती हैं ताकि कोई भी लड़की खाते-खाते रुके नहीं. वह बताती हैं, ‘अगर मेरी बेटी खाने से मना करती हैं तो मैं उसे कसकर पकड़ती हूं और उसे दोस्तों की तरफ नहीं देखने देती हूं. अगर वह तब भी नहीं मानती है तो मैं उसे बांध देती हूं.’

मोने और हेंदू की डाइट 9000 कैलोरी की होती है जो 30 चीजबर्गरों के बराबर और एक हैवीवेट बॉक्सर की डाइट का दोगुना है.
वैसे तो हर समाज में लड़कियों पर खूबसूरत दिखने का दबाव होता है लेकिन यहां छोटी-छोटी बच्चियों को जो प्रताड़ना और दर्द सहना पड़ रहा है, वह भयावह है. ज्यादा खाने की वजह से इन बच्चियों के लिए स्वास्थ्य खतरे भी पैदा हो रहे हैं.
एएक स्थानीय अबू बाकरी ने बताया, ‘अगर कोई महिला खूबसूरत नहीं है तो मैं उसके साथ कभी नहीं रहूंगा क्योंकि मोटी महिलाओं के साथ संबंध बनाना ज्यादा सुविधाजनक होता है.

सूखे की मार झेल रहे देश में पहले ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं मौजूद हैं. अनाज के संकट की वजह से परिवार कैमिकल्स का सहारा लेने से भी नहीं हिचक रहे हैं. कई बार लोग जानवरों को मोटा करने वाले कैमिकल्स से भी काम चला रहे हैं.
मैरियम नाम की महिला बताती हैं कि उनकी बेटी एजा जानवरों के लिए बनाए गए स्टेरॉयड ले रही थीं. उसका शरीर गुब्बारे की तरह फूल गया और उसकी अगले दिन मौत हो गई. इस हादसे के होने के बावजूद उसकी बहन एमिनेटू उसी ड्रग का सेवन कर रही है जिससे एजा की मौत हुई थी.

ये तो तय नहीं है कि कितनी लड़कियां इस फीडिंग सीजन के दंश से अपनी जिंदगी गंवा चुकी हैं लेकिन यहां अब भी अपनों को खोने के दुख पर पितृसत्तात्मक समाज की लड़कियों के खूबसूरत दिखने की मांग भारी पड़ रही है.

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