जरा हट के

ये है अस्थियो का बैंक, एक साल तक अगर नहीं ले गया मृतक का परिवार तो..

अस्थि बैंक में रखे अस्थिकलश।

कुछ बाते अक्सर सोचने पर मजबूर कर देती है. क्या ऐसा भी हो सता है आज की दुनिया में अभीकुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है. मगर जब सामने आती है तो होश तक उड़ जाते है. ऐसा ही कुछ आज हम आपको बताने जा रहे जिसे जानकर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे. बताते चले अब  अब तक आप लोग  बैंकों के लॉकर में पैसे रखते थे, लेकिन अब आपको यह जानकर हैरानी  होगा कि पुरखों की अस्थियां रखने के लिए अब लॉकर उपलब्ध होगा। इसके लिए घाटों पर अस्थि कलश बैंक की स्थापना होगी। इस बैंक में अस्थि कलश रखने के लिए सौ दो सौ रुपये फीस नहीं अदा करना होगा बल्कि पांच दस रुपये खुद की स्वेच्छा से देकर कलश को लॉकर में रखा जा सकेगा। इस बैंक की स्थापना युग दधिचि देहदान संस्थान करेगा।

अस्थि टोकन दिया जाएगा : अस्थियां सुरक्षित रखने के लिए आधार कार्ड की कॉपी और फोन नंबर साथ देने होंगे। इसके बाद अस्थि टोकन दिया जाएगा। इसी के साथ मृत व्यक्ति की अस्थि का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। अगर अस्थि टोकन गुम हो जाता है तो उसके रिश्तेदार द्वारा जमा करवाए गए आधार कार्ड के आधार पर अस्थि कलश लौटाया जाएगा।

कोई भूल न जाए, इसलिए हर महीने करेंगे कॉल 

  • मृत्युंजय सेवा संस्थान ने बताया कि कोई मित्र या रिश्तेदार अपने मृत परिजन की अस्थियों को बैंक में रखकर भूल ना जाए। इसलिए उन्हें हर माह फोन किया जाएगा। इसकी जानकारी एक रजिस्टर में रखी जाएगी कि कब और किसको कॉल किया और उसने क्या जवाब दिया है।
  • इस कार्य के लिए पुष्करणा समाज ने संस्थान को अस्थि बैंक बनाने के लिए जगह दी है।
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