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नफरत फैलाने वालों को रोकेगा Facebook, बैन होंगे ऐसे कॉन्टेंट

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव को लेकर राजनेता सोशल मीडिया को धारदार सियासी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ईवीएम पर वोटों की लड़ाई से पहले ट्विटर पर रोजाना सियासी आरोप-प्रत्यारोप की सियासत गरमाई हुई है। इस पर बताते चले सोशल नेटवर्क दिग्गज फेसबुक ने एक बड़ा ऐलान किया है. इसके तहत अब फेसबुक से White Nationalism और Separatism बैन कर दिया जाएगा. ये फैसला फेसबुक ने न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च आतंकी हमले के बाद लिया है जहां एक शूटर ने मस्जिद में घुस कर 50 लोगों की हत्या कर दी थी.
इस बीच बताते चले फेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है, ‘नई पॉलिसी के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम से श्वेत राष्ट्रवाद (White Nationalism) और अलगाववाद (Separatism) की प्रशंसा, समर्थन और प्रतिनिधित्व को बैंन किया जा रहा है और ये अगले हफ्ते से लागू होगा’. फेसबुक ने कहा है कि यह साफ है कि इस तरह के कॉन्सेप्ट पूरी तरह से ऑर्गनाइज्ड हेट ग्रुप्स के साथ लिंक्ड होते हैं और हमारी सर्विस में इनके लिए कोई जगह नहीं है.

फेसबुक ने उठाया बड़ा कदम 

गौरतलब है कि कुछ समय पहले से ही फेसबुक ने White Supermacist कॉन्टेंट को बैन कर दिया था. हालांकि वॉइट नेशनलिज्म को बैन करना बड़ा कदम बताया जा रहा है. हालांकि फेसबुक ने अपने इस ब्लॉग पोस्ट में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च आतंकी हमले का जिक्र नहीं किया है.

फेसबुक के मुताबिक

पिछले तीन महीनों में कंपनी ने सिविल सोसाइटी के लोगों से बातचीत की है जो इस मामले के एक्सपर्ट हैं और उन्होंने ये कन्फर्म किया है कि White Nationalism और Separatism को हेट White Supermacy के हेट ग्रुप से अलग नहीं रख सकते हैं.  फेसबुक ने इस तरह के कॉन्टेंट बैन करने से पहले इस तरह के ऑर्गनाइजेशन का रिव्यू किया है और इसे खतरनाक बताया है. फेसबुक ने कहा है कि लोग अभी भी अपने धर्म को लेकर गर्व का प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन श्वेत राष्ट्रवाद और श्वेत अलगाववाद के लिए प्रशंसा या समर्थन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.फेसबुक ने कहा है 

इस तरह के कॉन्टेंट को बैन करना ही अंत नहीं है, बल्कि कंपनी लोगों के साथ कनेक्ट होगी जो इस तरह के राष्ट्रवाद और अलगाववाद से जुड़े हैं.  फेसबुक ने कहा है, ‘अफोसस है कि कुछ लोग हमेशा ही हमारे सिस्टम को टार्गेट करने की कोशिश करते हैं ताकि नफरत फैलाई जा सके. हमारा चैलेंज इससे आगे रहना है और लागातार अपनी टेक्नलॉजी को इंप्रूव करना है, पॉलिसी को बेहतर करते हुए एक्सपर्ट्स के साथ काम करना है.’

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