जिंदगी

मेजर ने शहादत के बाद भी निभाया पत्नी से किया वादा, इनकी कहानी ला देगी आंख में पानी

एक फौजी किसी भी देश का सबसे अभिन्न अंग होता हैं. ये फौजी बिना अपनी जान की परवाह किए देश की बॉर्डर पर दिन रात तैनात रहता हैं ताकि हम चैन की नींद सौ सके. ये फौजी अपने परिवार वालो से भी दूर रहते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसी फौजी के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने परिवार से दूर था लेकिन फिर भी उसने एक देशभक्त और पति दोनों होने का कर्तव्य निभाया.

दरअसल हम यहाँ बात कर रहे हैं देश के बहादुर जवान मेजर शशि धारण नायर की. नायर हाल में LOC पर देश की रक्षा करते हुए शहिद हो गए. ऐसे में आज हम इस बहादुर सैनिक और उनकी पत्नी तृप्ति की लव स्टोरी आपको बताने जा रहे हैं. मेजर शशि धारण नायर के बचपन के दोस्त हरीश कसरखोड़ बताते हैं कि “वो हमेशा से ही आर्मी में जाने को लेकर उत्साहित थे. बी.एस.सी. की डिग्री लेने के बाद उन्होंने कभी किसी और करियर आप्शन के बारे में नहीं सोचा. उन्होंने ग्रेजुएशन होते ही सीधा आर्मी की परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर दी और उसमे कड़ी मेहनत कर पास हुए. कुछ सालो पहले शशि के पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद उनकी माँ और बीवी की सारी जिम्मेदारी उन्ही के कंधो पर आ गई थी.”

नायर और उनकी बीवी तृप्ति की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प हैं. इन दोनों की पहली मुलाक़ात पुणे में एक कॉमन दोस्त के जरिये हुई थी. यहाँ ये दोनों पहले अच्छे दोस्त बने और फिर दोनों को एक दुसरे से प्यार हो गया. इसके बाद जल्द ही दोनों ने सगाई भी कर ली. उस दौरान तृप्ति कंप्यूटर एप्लीकेशन में प्रोफेशनल मास्टर थी जबकि नायर कप्तान के पद पर कार्यरत थे.

सगाई के 8 महीनो बाद ही तृप्ति को एक गंभीर बीमारी हो गई. इस बिमारी ने उन्हें व्हीलचेयर पर बैठा दिया. इस घटना के बाद समाज के कई लोगो ने नायर को सलाह दी कि वो ये शादी कैंसिल कर दे. लेकिन नायर तृप्ति से सच्चा प्यार करते थे, इसलिए उन्होंने तृप्ति से सगाई के बाद शादी का वादा निभाया और दोनों ने साल 2012 में शादी कर ली.

शादी के कुछ महीनो बाद ही तृप्ति को पेरालिसिस का अटैक आ गया जिसकी वजह से उनकी बॉडी के निचले हिस्से ने पूरी तरह कम करना बंद कर दिया. हालाँकि इस मुसीबत को भी तृप्ति और नायर ने हँसते हुए झेल लिया और ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आर्मी में इन दोनों की लव स्टोरी काफी फेमस हैं. ये दोनों हर पार्टी और इवेंट साथ में अटेंड करते थे. कई बार तो नायर खुद तृप्ति की व्हील चेयर धकेलते हुए ले जाते थे.

हाल ही में मेजर की LOC पर पोस्टिंग हुई थी और उन्हें 2 जनवरी को ज्वाइन करना था. ऐसे में इसके पहले उन्होंने एक महीने की छुट्टी ली और ये समय पुणे में अपनी वाइफ के साथ बिताया. तृप्ति को हमेशा नायर की सेफ्टी की चिंता सताती रहती थी. ऐसे में नायर ने जाने के पहले अपनी बीवी से वादा किया कि वो वापस जरूर आएगा. ऐसे में कुछ दिनों बाद वे वापस जरूर आए लेकिन तिरंगे में लिपटे हुए.

13 जनवरी को नायर ने LOC पर एक जंग लड़ी जहाँ एक आतंकवादी ब्लास्ट के दौरान उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली और वे शहीद हो गए. इसके बाद उनके शव को तिरंगे में लपेट कर नेशनल वर मेमोरियल पुणे में लाया गया जहाँ पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ. इस दौरान नायर की बीवी व्हीलचेयर पर बैठ वहां आई और अपने पति को अंतिम अलविदा कहा.

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