जिंदगी

क्या आप भी पराई महिला के साथ करते है सम्भोग, तो बन सकते है पाप के भागीदार…

मर्दों में कुछ आदते ऐसी होती है जिनसे अक्सर पति -पत्नी के बीच कलह का कारण बनती है. कभी कभी कभी बात इनती बिगड़ भी जाती है जिससे रिश्तो में खटास तक आने लगती है.

वो रिश्ता फिर आखिर में समाप्ति की कगार पर आ ही जाता है. हम बाते है मर्दों का पराई इस्त्री के तरफ आकर्षित होना बता दे  भारत में बल्कि दुनिया के लगभग हर देश में शादी शुदा जोड़े अपनी पति अथवा पत्नी को छोड़कर पराई औरतों या फिर मर्दों की ओर आकर्षित होते है। शादी के बाद दूसरी औरतों की ओर आकर्षित होना होना मर्दों की आदत के तौर पर शुमार होता जा रहा है। ऐसे में एक सवाल जो सबके मन में उठता है वो ये कि आखिर मर्द दूसरी औरतों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं।

शर्म और लज्जा स्त्री का सबसे अहम गहना होता है। जिस स्त्री ने इनको बेच खायी वह दुनिया में किसी की सगी नहीं हो सकती है। और शास्त्रों में किसी पराई स्त्री के साथ सम्भोग को भी बुरे कर्मों की श्रेणी में रखा गया है और इसके भी कई परिणाम भुगतने पड़ते है। शास्त्रों के अनुसार किसी पराई स्त्री के साथ सम्भोग करना पाप माना जाता है, और ऐसे इंसान को सीधे नर्क में जाना पड़ता है। वही किसी स्त्री के ऊपर बुरी नज़र रखने वाले, किसी पराई स्त्री के साथ संभोग का सोचने वाले लोगो को भी नर्क में ही जगह दी जाती है।

जो लोग धर्म, देवता और पितरों का अपमान करते है ऐसे व्यक्ति पापी, मूर्छित कहलाते है और ये लोग नर्क में जाते है।नर्क में लोगो को अपने-अपने कुकर्मों के अनुसार दंडित किया जाता है और उस नर्क को झेलने की अवधि भी उसके किये गए पाप के अनुसार ही तय होती है।

उसी प्रकार जो व्यक्ति हर वक्त क्रोध में रहता है, कलह करने वाले, सदा दूसरों को धोखा देने वाले, शराब पीने वाले, मांस खाने वाले, दूसरों के बारे में बुरा सोचने वालो को भी नर्क जाना पड़ता है।

उन लोगो को भी नर्क भी हवा खानी पड़ती है जो दूसरों को ठगते है, किसी की कीमती चीज़े चुराकर रखने वाले, पैसे दान नही करने वाले, नौकरों के साथ बुरा व्यवहार करने वाले लोग भी सीधे नर्क में जाते है।

वहीं बुरे काम करने वाले किसी व्यक्ति का साथ देने वाले लोग भी उसके इस काम में बराबर के भागीदार माने जाते है और ऐसे लोगो को भी नर्क में जगह मिलती है।कहने का मतलब यही है की बुरे काम करने का नतीज़ा हमेशा बुरा ही होता है, ये बात हमारे प्राचीन शास्त्रों में सदियों पहले ही लिखी जा चुकी है।

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