उत्तर प्रदेश

अखिलेश के सपोर्ट को कांग्रेस तैयार, नहीं उतारेगी अपना उम्मीदवार !

अखिलेश राहुल के लिए इमेज परिणाम

नई दिल्ली । उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आजमगढ़ संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। वहां से वह लड़ते हैं, तो कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। सपा –बसपा गठबंधन तथा कांग्रेस के समर्थन के चलते वह इस संसदीय क्षेत्र के यादव, मुसलमान, दलित व कुछ राजपूत मतदाताओं के एकजुट वोट की बदौलत अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी को हरा सकते हैं।

इस बारे में बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे कांग्रेस के नेता व एआईसीसी सदस्य अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में लड़ाई कांटे की है। कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। केन्द्र की सत्ताधारी पार्टी व उसके शीर्ष नेतृत्व से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। वह बहुत ही आक्रामक हैं। जो बेरोजगारी, महंगाई से परेशान युवा मतदाताओं व जनता को अपील कर रहा है। कांग्रेस के समर्थक भी धूल झाड़कर खड़े होने लगे हैं। प्रियंका गांधी के कांग्रेस की राजनीति में आने और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाये जाने से इसको और बल मिल रहा है। इसलिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति अगले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है। इस दौरान सत्ताधारी पार्टी को विपक्ष तभी घेर पाएगा, जब आपसी तालमेल से चुनाव लड़े। इस रणनीति के तहत कांग्रेस अपनी तरफ से हर तरह से विपक्षी दलों के साथ तालमेल करने, सहयोग करने के लिए तैयार है।

ऐसे में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव यदि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की जगह 2019 में आजमगढ़ संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं, तो कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। चूंकि सपा व बसपा गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली से अपना प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय किया है। इसलिए कांग्रेस भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, संरक्षक मुलायम सिंह यादव तथा बसपा प्रमुख मायावती जिन संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी, वहां कांग्रेस अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करेगी।

पूर्वांचल के वरिष्ठ पत्रकार वशिष्ठ नारायण का कहना है कि कांग्रेस आजमगढ़ संसदीय सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा करने के लिए पार्टी पदाधिकारियों के मार्फत सर्वेक्षण करा रही थी। कार्यकर्ताओं, जनता की राय ले रही थी। लेकिन जिस दिन (रविवार 10 मार्च ) केन्द्रीय चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा की, उसी दिन यह सर्वेक्षण कार्य रोक दिया गया। उनको पता चला कि आजमगढ़ संसदीय सीट से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ेंगे। उनको कांग्रेस समर्थन करेगी।

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से 2014 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश के पिता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे। वह 2019 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी संसदीय सीट से लड़ेंगे। सपा ने प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की है उसमें उनको मैनपुरी से प्रत्याशी बनाया गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव दो लोकसभा सीट – आजमगढ़ व मैनपुरी से चुनाव लड़ा था| वह दोनों पर जीते थे। बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दिया और आजमगढ़ संसदीय सीट से सांसद बने रहे। अब वह 17 वीं लोकसभा का चुनाव मैनपुरी संसदीय सीट से लड़ रहे हैं, जहां से 2014 के लोकसभा चुनाव में बहुत अधिक मतों से जीते थे।

मुलायम सिंह ने 2014 में आजमगढ़ लोकसभा सीट से 63204 मतों से जीता था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के चर्चित प्रत्याशी (भाजपा) रमाकांत यादव को हराया था। उस चुनाव में इस सीट पर सपा के मुलायम सिंह यादव को 3,40,306 वोट मिले थे। भाजपा के प्रत्याशी रमाकांत यादव को 2,77,102 वोट मिले थे। बसपा प्रत्याशी को 2,66,528 वोट मिले थे। कांग्रेस ने मुलायम सिंह यादव के समर्थन में प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। वरिष्ठ पत्रकार नवेन्दु का कहना है कि 2019 का लोकसभा चुनाव सपा व बसपा गठबंधन करके लड़ रही हैं। ऐसे में यदि 2014 के चुनाव में मिले दोनों के प्रत्याशियों के वोट जोड़ते हैं,

तो हो जाता है 3,40,306 + 2,66,528 = 6,06,834, जो कि भाजपा के प्रत्याशी को मिले वोट से 329732 अधिक है। इस बार फिर आजमगढ़ की सीट सपा के खाते में हैं। यहां से यदि सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव चुनाव लड़ते हैं, तो बसपा व कांग्रेस के समर्थन के चलते मुस्लिम व यादव बहुल इस सीट पर वह दलित, मुसलमान व यादव मतदाताओं के एकजुट वोट के बदौलत आसानी से जीत सकते हैं। यही वजह है कि अखिलेश यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस मुस्लिम व यादव बहुल संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

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