उत्तर प्रदेशराजनीति

योगी ने यूपी में ऐसा क्या कर दिया कि लगातार हारती बीजेपी को दिला दी प्रचंड जीत ?

जैसा अनुमान एग्जिट पोल्स ने जताया था, चुनाव नतीजे भी कमोवेश वैसे ही आए हैं. प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी हुई है. खास बात ये है कि जिस उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने बरसों पुरानी अदावत भुलाकर हाथ मिलाया, वहां भी भाजपा का उतना नुकसान नहीं हुआ, जितने की इन दोनों ने उम्मीद लगाई थी. बीजेपी की इस जीत का जितना क्रेडिट पीएम मोदी के नाम को जाता है, उतना ही सीएम योगी के काम को जाता है.

पिछले साल की ही बात है. सपा-बसपा का साथ नया-नया था और इस साथ के चलते बीजेपी को उपचुनावों में लगातार हार मिल रही थी. बीजेपी फूलपुर, गोरखपुर, कैराना और नूरपुर का चुनाव हार चुकी थी. सूबे की सत्ता संभालने के बाद लगातार पराजय से योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व क्षमता पर दबे सुर में सवाल होने लगे थे. लेकिन 2019 में योगी ने साबित कर दिया कि अगर देश में मोदी-मोदी का नारा गूंजता है तो यूपी में योगी-योगी ही सुनाई देता है.

दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से सेना की शौर्यगाथा का बखान करते हुए एयर स्ट्राइक का जिक्र किया, उसने एक नया नैरेटिव सेट कर दिया. इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए योगी ने प्रखर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का पूरे प्रचार के दौरान जमकर इस्तेमाल किया. नए तेवर से योगी हिंदुत्व के पोस्टर ब्वॉय बनकर उभरे.

उनकी कट्टर हिंदुत्व वाली छवि को देखते हुए ही बीजेपी ने इस बार चुनाव प्रचार में उन्हें पूरी तरह झोंक रखा था. 24 अप्रैल को सहारनपुर में विजय संकल्प रैली के साथ योगी ने लोकसभा चुनाव प्रचार का आगाज किया. इसके बाद योगी बिना रुके-थके लगातार रैलियां करते रहे. उत्तर प्रदेश के बाहर योगी की काफी डिमांड रही. पार्टी के आदेश पर योगी ने लगभग सभी बड़े राज्यों में रैलियां और रोड शो किए. 24 अप्रैल से 17 मई के बीच 9 राज्यों में योगी ने तकरीबन 150 रैलियां और चुनाव सभाएं कीं. पूरे प्रचार के दौरान योगी अपनी फायरब्रांड शैली में विपक्षियों को निशाने पर लेते रहे.

पूरे प्रचार अभियान में योगी के निशाने पर राहुल गांधी से ज्यादा अखिलेश यादव और मायावती रहीं. बुआ-बबुआ पर उन्होंने कई दफे चुटकी ली. उन्होंने कहा कि 23 मई के बाद यही ‘दोस्त’ ‘दुश्मन’ बन जाएंगे. सपा-बसपा को उन्होंने तमाम उपमाओं से विभूषित भी किया. बुंदेलखंड में योगी ने इनकी दोस्ती पर तंज करते हुए कबीर के दोहे ‘झूठे को झूठा मिले, दुंणा बंधे सनेह’ भी सुनाया. अगर आज बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई है तो मोदी मैजिक के साथ-साथ इसका श्रेय ब्रांड योगी को भी देना होगा. योगी ने अपनी नेतृत्व क्षमता का इस बार लोहा मनवाया है. योगी ने अपनी नेतृत्व क्षमता का इस बार लोहा मनवाया है. आने वाले वक्त में योगी का कद और बढ़ना तय है.

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