उत्तर प्रदेश

धरी रह गई अखिलेश की सारी सियासत, दोबारा सपा बनाने का जिम्मा उठा लिए मुलायम

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव में शिकस्त के बाद अब समाजवादी पार्टी आत्ममंथन करने में जुटी है। पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सोमवार को विक्रमादित्य मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय पर चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं। बैठक में पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी समेत पार्टी के प्रदेश स्तर के नेता शामिल हैं।
सपा ने लोकसभा चुनाव बसपा और रालोद के साथ मिलकर लड़ा था। बसपा ने 38, सपा ने 37 और रालोद ने 03 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। वहीं रायबरेली और अमेठी सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई। अखिलेश को यकीन था कि गठबंधन के बात जातीय समीकरण गठबंधन के पक्ष में होंगे और केन्द्र में सरकार बनने में उनकी अहम भूमिका होगी। हालांकि नतीजा आने पर अखिलेश का सपना एक बार फिर टूट गया।
विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन पार्टी के लिए नुकसान का सौदा साबित हुआ। पार्टी के हिस्से में 2014 की तरह पांच सीटे तो आयीं, लेकिन यादव परिवार के सदस्य ही जनता का भरोसा जीतने में असफल रहे। कन्नौज से अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव, दोनों चचेरे भाई फिरोजाबाद से अक्षय यादव और बदायूं से धर्मेन्द्र यादव चुनाव हार गये। ये सीटें सपा का गढ़ मानी जाती थीं। मुलायम कुनबा इस चुनाव के बाद और भी कमजोर साबित हुआ है।
इसलिए अब पार्टी अब हार के कारणों पर मंथन करने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक खराब प्रदर्शन का ठीकरा सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष पर फूटेगा। सपा अध्यक्ष संगठन में बदलाव करेंगे। संगठन में जमीन से जुड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी ज सकती है। इससे पूर्व अखिलेश ने मीडिया पैनलिस्टों को पहले ही हटा दिया है।
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